महबूब सांप से मुलाक़ात

सेंसर व शक्ति से लैस कोबरा नाग के सामने मेरा यह पहला अनुभव था. "डंडा दो!" कहते ही एक भारी भरकम लंबा लठ्ठ मेरे हाथ में थमा दिया गया. जबकि मेरी दरकार सिर कुचलने की नहीं, उन्हें टरकाने भर की थी. हम सब के भीतर एक डर था और नाग को छू कर पकड़ना नितांत आवश्यक हो गया था.

-पृथ्वी 'लक्ष्मी' राज सिंह


प्रिय लोगों से मुलाकातें यादगार होती हैं. अक्सर वह लोग मिलने चले आते हैं, कभी हम उनके पास चले जाते हैं. नितांत व्यक्तिगत इन मुलाकातों को अमुमन मैं कैमरे में कैद नहीं करता और पोस्ट करने से भी परहेज रखता हूँ.


आपके दोस्त आये हैं! सूचना देने वाले के लिए इतना ही काफी होता है. लेकिन यही शब्द आपके भीतर जिज्ञासा बड़ा देते हैं कि कौन आये होंगे !


ऐसे ही एक संदेश में आज जब दौड़ा चला गया तो देखा अहा! परम प्रिय हमारा इन्तजार कर रहे हैं. सात नौ इंची इंटों में परसा उनका सुन्दर वंता ब्लैक शरीर व मेरे स्वागत में फैला हाई फाइव फन. यह अद्भुत पल थे!


सांप कहने में मुझे अपने सबसे प्रिय सौम्य ट्रिंकेट या महा ड्रामाबाज रैट स्नेक से मुलाकात की उम्मीद रहती है. आम तौर पर कोबरा नाग इन ऊंचाई में कम ही सुने गये हैं. हमारी यह पहली मुलाकात थी.


सांपों के बारे में मेरी जानकारी मिथकीय नहीं बहुत सामान्य है. इन्हें देखना अत्याधुनिक सेंसर युक्त किसी मंहगी गाड़ी को देखने जैसा रोमांचकारी है. मुझे नहीं याद बांकी अमल जिन्दगी में कैसे आये लेकिन सांपों के प्रति यह अमल मेरे में मनीष राय की वजह से है कि सहअस्तित्व की इस जद्दोजहद में एक दुसरे का सम्मान बहुत जरूरी है.


सेंसर व शक्ति से लैस कोबरा नाग के सामने मेरा यह पहला अनुभव था. डंडा दो! कहते ही एक भारी भरकम लंबा लठ्ठ मेरे हाथ में थमा दिया गया. जबकि मेरी दरक़ार सिर कुचलने की नहीं, उन्हें टरकाने भर की थी. हम सब के भीतर एक डर था और नाग को छू कर पकड़ना नितांत आवश्यक हो गया था.


सब मुलाकातों में यह एक यादगार मुलाकात थी. पितृपक्ष नहीं होते तो शायद यह मुलाकात भी नहीं होती. पंडित जी का इसमें कोई फायदा मुझे नहीं दिखता. हाँ आप पर बना रहे गेब्रियल गार्सिया मार्ख़ेस का आर्शीवाद और आप सब इतना भर अंधविश्वासी हमेशा बने रहें. जब भी देखें प्रिय को तो हमें बता दें या इतना भर डरते हुए बस इतना सा हटा दें कि जीवन जीने में भुमिका रहे सहअस्तित्व की, जीने की सामाजिकता बनी रहे। प्रिय के साथ फोटो फिर नहीं है लेकिन आज खुब कहने का मोह है.

आज भरभर के पढ़ा सरदार जाफ़री को कि;

"ख़ुदा सलामत रखे मेरे इन हाथों को अता हुए हैं जो तेरी ज़ुल्फ़ सवांरने के लिए"

- पृथ्वी २१/०९/२०१९) रामगढ़ #काली_नागिन_सी_तेरी_जुल्फ