'चीनी लैब में कोरोना की पैदाइश का अमेरिका के पास कोई सबूत नहीं' : चीन

कोरोना वायरस के प्रकोप ने अमेरिका और चीन के बीच के शीत युद्ध में बयानबाज़ी की गर्माहट ला दी है. लगातार हमलावार अमेरिकी नेताओं पर अब चीन ने पलटवार किया है.

चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी ने अमेरीकी सरकार के उन दावों पर तीखी टिप्पणियों के साथ पलटवार किया है जिसमें वह लगातार चीन पर कोरोनावायरस को जानबूझकर फ़ैलाने का आरोप लगा रहे हैं. रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पेओ ने राष्ट्रपति ट्रम्प के बयानों को सहारा देते हुए कहा था कि ''ठोस सबूत'' बताते हैं कि कोरोना वायरस चीन के शहर वुहान में मौजूद एक वायरोलॉजी लैब से ही शुरू हुआ। हालांकि इन दावों को विश्व स्वास्थ संगठन और कई वैज्ञानिक लगातार ख़ारिज़ कर रहे हैं। चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी में एक बयान में कहा गया है,


''अमेरिकी राजनीतिज्ञों की ओर से दिए जा रहे इन झूठे और अनुचित बयानों ने अधिक से अधिक लोगों के सामने यह साफ़ कर दिया है कि इस बारे में कोई भी 'सबूत' है ही नहीं.'' ''यह बयान कि 'वायरस वुहान की एक लैब से लीक हुआ' पूरी तरह झूठ है. अमेरिकी राजनीतिज्ञों में अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए दोष को दूसरे के सिर मढ़ने की होड़ लगी हुई है. एक ऐसे समय में जब महामारी से जूझने के उनके ख़ुद के प्रयास अफ़रा तफ़री में बदल गए हैं, उनका मक़सद वोटरों को छलना और चीन को बदनाम करना है।''

इसी तरह का एक बयान सोमवार को सरकारी समाचार पत्र पीपल्स् डेली में भी छपा था जिसमें पॉम्पेओ और व्हाइट हाउस के पूर्व स्ट्रेटेजिस्ट स्टीव बैनॉन को ''एक जोड़ा मसख़रा'' लिखा गया था और बैनॉन को 'शीत युद्ध के ​जीवाश्म' की संज्ञा दी गई थी क्योंकि उन्होंने पिछले हफ़्ते चीन पर बायोलॉजिकल चैरनोबिल को अंजाम देने के आरोप लगाए थे और कहा था कि चीन ने यह वायरस वुहान की लैब में ही विकसित किया था.

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