क्या चीन पर आरोप लगा कर ध्यान भटका रहे हैं ट्रंप?

दोबारा से प्रेस ब्रीफ़िंग शुरू करते ही चीन पर इस तरह हमलावार होना अमेरिकी राष्ट्रपति की उस कूटनीति का हिस्सा हो सकता है जिसमें वह अपने बयान से हुए विवाद पर से ध्यान भटकाकर मीडिया और उनके आलोचकों का ध्यान चीन की ओर भटका देना चाहते हैं.

- Khidki Desk


image courtesy : The White House (Twitter Account)

अपने एक बयान से एकबार फिर दुनियाभर में काफ़ी शर्मिंदगी बटोर चुके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने व्हॉइट हाउस की डेली प्रेस ब्रीफिंग को पिछले कुछ दिनों से यह कहते हुए बंद क​र दिया था कि यह ऐसे महत्वपूर्ण समय में वक़्त जाया करना है. लेकिन उन्होंने फिर से अपनी डेली प्रेस ब्रीफिंग शुरू की है और पहले ही दिन चीन पर हमला करने के अपने पुराने अभियान को छेड़ दिया है. भारतीय समय के मुताबिक़ आज सुबह तक़रीबन तीन बजे हुई इस प्रेस ब्रीफ़ में ट्रंप ने कहा, ''कई तरीक़े हैं जिनसे चीन को जवाबदेह बनाया जा सकता है. हम चीन से बिल्कुल खुश नहीं हैं.. हम इन हालातों से एकदम खुश नहीं हैं. क्योंकि हमारा यक़ीन है कि इसे इसके स्रोत पर ही रोका जा सकता था. इसे जल्दी से रोका जा सकता था. और अगर ऐसा किया गया होता तो यह पूरी दुनिया में नहीं फ़ैला होता. और हमें लगता है यह किया जाना चाहिए था. तो हम आपको बताएंगे कि सही समय क्या है लेकिन अभी यह बता दूं कि हम एक गंभीर जांच कर रहे हैं.'' इधर ट्रंप के बयान के तुरंत बाद चीन ने अमेरिकी राजनेताओं पर साफ़ तौर पर झूठ बोलने के आरोप लगाए हैं. चीन की ओर से आरोप लगाया गया है कि ट्रम्प समेत दूसरे अमेरिकी नेता अपनी नाक़ामी को छिपाने के लिए चीन पर आरोप लगा रहे हैं. महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच दुनिया की इन दोनों महाशक्तियों के बीच बयानबाज़ी बाज़ी का नया शीतयुद्ध लगातार जारी है. इससे पहले ट्रम्प, चीन को ''चाइना वायरस'' भी कह चुके हैं जिस पर चीन ने कड़ा ऐतराज़ जताया था. और उसके जवाब में चीन ने आरोप लगाए थे कि यह चीन के ​वुहान शहर में कोरोनावायरस को फ़ैलान अमेरिकी सेना की साजिश हो सकती है. अमेरिकी राष्ट्रपति कुछ दिन पहले अपने दिए एक बयान के बाद विवादों में घिर गए थे जिसमें उन्होंने कहा था कि कीटनाशकों और अल्ट्रावॉयलेट किरणों को शरीर में इंजेक्ट कर कोरोनावायरस का इलाज किया जा सकता है. जानकारों की राय है कि दोबारा से प्रेस ब्रीफ़िंग शुरू करते ही चीन पर इस तरह हमलावार होना अमेरिकी राष्ट्रपति की उस कूटनीति का हिस्सा हो सकता है जिसमें वह अपने बयान से हुए विवाद पर से ध्यान भटकाकर मीडिया और उनके आलोचकों का ध्यान चीन की ओर भटका देना चाहते हैं. ट्रम्प के बयान के बाद उनकी काफ़ी आलोचना हुई थी. अमेरिकी मेडिकल जगत ने उनके बयान को ग़ैर ज़िम्मेदार और जानलेवा बताया था. हालात यह हो गए थे कि अमेरिकी राज्य मैरीलैंड को अपने नागरिकों के लिए एक एडवाइज़री जारी करनी पड़ी थी कि वे कीटनाशकों का सेवन ना करें.

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