ख़ूबसूरत कुमाऊंनी लोरी 'चेली' ​रीलीज़, हिंदी अर्थ भी जानें

एक पहाड़ी नदी को देख, मासूम बेटी की फूटती जिज्ञासाओं और मां के, फरों वाले कम्बल जैसे निमैले जवाबों से तैयार यह लोरी आपको गर्माहट से भर देती है. चर्चित कवि अनिल कार्की की संवेदनाओं से उपजी इस ख़ूबसूरत लोरी को संगीत में बांधा है 'पहाड़ी' ने. यहां उन लोगों के लिए इस लोरी का हिंदी तर्जुमा भी पेश किया गया है जो कुमाउंनी से वाकिफ़ नहीं हैं.


ईजा ओ ईजा एक बात बातैदे गंङ किलै मुलमुल हांसैछी? पोथी लाड़िली हिमालैकि चेली सूरज गंङकै कालकुती लगूँछ

मां.. ओ मां एक बात बता दो मुझे नदी क्यों धीमे धीमे हंसती है? मेरी प्यारी लाडली हिमालय की बेटी! सूरज नदी को गुदगुदी लगाता है


ईजा ओ ईजा एक बात बातैदे गङ किलै मीठी सूसाट मचूँछी? पोथी लाड़िली हिमालैकि चेली गंङ घूघती कें धाद लगूँछी

मां.. ओ मां.. एक बात बता दो मुझे ये नदी क्यों इतनी मीठा शोर मचाती है? मेरी प्यारी लाडली, हिमालय की बेटी! नदी घुघुती* को आवाज़ देती है.

*एक पहाड़ी पक्षी


ईजा ओ ईजा एक बात बातैदे ठण्डो किलैं छ गंङा को पाणी? पोथी लाड़िली हिमालैकि चेली गंङा कि माया हिमालै ले जाणी

मां.. ओ मां.. एक बात बता दो मुझे नदी का पानी इतना ठंडा क्यों है? मेरी प्यारी लाडली, हिमालय की बेटी! नदी का प्रेम हिमाल को मालूम है.


ईजा ओ ईजा एक बात बातैदे गंङा कि उमर कतुकै कि होली पोथी लाड़िली हिमालैकि चेली उतैकि जतुकै रितु बसन्त की रोली

मां.. ओ मां.. एक बात बता दो मुझे नदी की उम्र कितनी (और) होगी? मेरी प्यारी लाडली हिमालय की बेटी! उतनी ही जितनी बसंत रितु की होगी.


ईजा ओ ईजा एक बात बातैदे गंङा किलै नै पटाई विछूँछी? पोथी लाड़िली हिमालैकि चेली सागर ऊको बाटो चै रुँछ

मां.. ओ मां.. एक बात बता दो मुझे नदी थक कर सुस्ताती क्यों नहीं? मेरी प्यारी लाडली, हिमालय की बेटी! सागर उसकी बाट जोहता है.


आब आली आब आली लाड़िली चेली आली ला

अब आएगी आएगी लाडली बेटी आएगी..


मुनाल मेरी प्योली बुरुंजी जुग जुग रैये मेरी आँचरी बयाली मयाली ज्युन्याली चेली मेरी प्योली बुरुंजी

मेरी मुनाल, मेरी प्योली बुरांश* जैसी बेटी युगों युगों तक तू रहना मेरे आंचल में बयार जैसी, प्यार से भरी चांदनी जैसी मेरी बेटी मेरी प्योली* बुरांश* जैसी बेटी

*पहाड़ी फूल

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