बेरूत के लोगों का फूटा गुस्सा, सरकार से इस्तीफा मांगा

धमाके की वजह लापरवाही थी. जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि अमोनियम नाइट्रेट से भरे कार्गो पिछले कई सालों से समुद्र किनारे बिना सुरक्षा प्रबंध के रखे हुए थे. कई बार अधिकारियों को चेतावनी देने के बावजूद इन्हें नहीं हटाया गया.

khidki desk


लेबनान में हुए जबरदस्त विस्फोट के दो दिन बाद बेरूत में लोगों में सरकार और नेताओं के खिलाफ काफी गुस्सा देखा जा रहा है. इस हादसे में मरने वालों की तादाद 150 से अधिक हो गई है, तकरीबन पांच हजार लोग घायल हैं और दर्जनों लोग अब भी लापता हैं. आशंका जताई जा रही है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कई लोग जमींदोज हो चुकी इमारतों के मलबे तले दबे हुए हैं. राजधानी बेरूत में दो सप्ताह के लिए इमरजेंसी लगा दी गई है.


अब तक मिली जानकारी के मुताबिक धमाके की वजह लापरवाही थी. जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि अमोनियम नाइट्रेट से भरे कार्गो पिछले कई सालों से समुद्र किनारे बिना सुरक्षा प्रबंध के रखे हुए थे. कई बार अधिकारियों को चेतावनी देने के बावजूद इन्हें नहीं हटाया गया.


सीएनएन की खबर के मुताबिक 2013 में एक रूसी जहाज जॉर्जिया के बटूमी से 2750 मीट्रिक टन अमोनियम नाइट्रेट लेकर मोजाम्बिक के लिए निकला था. जहाज का नाम एमवी रोसस था. जहाज ग्रीस में ईंधन भरवाने रुका. यहां जहाज के मालिक ने बताया कि पैसे खत्म हो गए हैं और उन्हें लागत कवर करने के लिए एक्स्ट्रा कार्गो लोड करने होंगे. इस वजह से उन्हें बेरूत का चक्कर लगाना पड़ा और जहाज बेरूत पहुंच गया, जहां जहाज को सरकार ने कब्जे में ले लिया.


लेबनान के कस्टम विभाग के निदेशक बदरी दहेर ने बताया कि कई बार चेतावनी दी गई कि यह जहाज एक तैरता बम है. 2014 में जहाज से अमोनियम नाइट्रेट के कंटेनरों को उतारकर पोर्ट के स्टोर रूम में रख दिया गया. तब से वहीं पड़े थे. अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल ज्यादातर फर्टिलाइजर के तौर पर और माइनिंग के लिए ब्लास्ट करने के लिए होता है.



बृहस्पतिवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रां ने बेरूत का दौरा किया. उन्होंने लेबनान के लोगों को भरोसा दिया कि मुसीबत की इस घड़ी में फ्रांस हर मुमकिन मदद करेगा. साथ ही यूरोपीय यूनियन समेत अन्य देशों से भी सहायता की अपील करेगा.


बेरूत में स्थानीय लोगों ने सरकार से इस्तीफे की मांग करते हुए सड़क पर प्रदर्शन किया. वे देश के भ्रष्ट हो चुके तंत्र को कोसते हुए नेताओं के खिलाफ नारे लगा रहे थे. मैक्रां ने इस मौके पर कहा कि अगर लेबनान का नेतृत्व देश में सुधारों को लागू नहीं करेगा तो आर्थिक संकट से जूझ रहे देश की हालत और भी खराब हो सकती है.


लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी एनएनए के मुताबिक सरकार ने बंदरगाह में काम करने वाले 16 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है. विदेश मंत्री शारबेल वेहबे ने बताया कि सरकार ने इस हादसे की जांच के लिए एक समिति बनाई है, जिसको चार दिनों के अंदर जांच कर इस विस्फोट के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करनी है.


बुधवार को लेबनान की सरकार ने ये घोषणा की थी कि जांच पूरी होने तक बेरूत पोर्ट के कई अधिकारियों को उनके घर में नजरबंद किया जा रहा है. देश की सर्वोच्च सुरक्षा परिषद ने जोर दिया है कि जो भी जिम्मेदार पाए जाते हैं, उन्हें अधिकतम सजा दी जाएगी. एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच ने धमाके की स्वतंत्र जांच की मांग की है.


संयुक्त राष्ट्र ने हालात से निपटने के लिए 7 मिलियन डॉलर लेबनान को जारी कर दिए हैं. वहीं समाचार एजेंसी एएफपी को यूरोपीय यूनियन ने बताया कि उसने आपात सहायता के तौर पर 33 मिलियन यूरो लेबनान को दिए हैं, ताकि इमरजेंसी सेवाओं और अस्पतालों को चलाने में दिक्कत न हो.


वहीं अमेरिकी सेना ने सी 17 विमानों के जरिए बेरूत में खाना, पानी और दवाएं भेजी हैं. इसके अलावा इटली और डेनमार्क समेत दुनियाभर से मदद भेजी जा रही है. देश के स्वास्थ्य मंत्री हमाद हसन ने कहा है कि अस्पताल में बिस्तरों की कमी है. घायलों के इलाज के लिए आवश्यक उपकरण भी कम पड़ रहे हैं, साथ ही गंभीर मरीजों को भी सुविधा मिलने में परेशानी हो रही है.


बेरूत के गवर्नर मरवान अबूद ने कहा है कि धमाके के कारण तीन लाख लोग बेघर हो गए हैं. आर्थिक मामलों के मंत्री राउल नेहमे ने कहा है कि देश को पुनर्निर्माण के लिए विदेशी सहायता पर निर्भर करना पड़ेगा. लेबनान के केंद्रीय बैंक ने बंदरगाह और कस्टम के अधिकारियों के खाते फ्रीज कर दिए हैं. साथ ही बैंकों और वित्तीय संस्थाओं से अपील की है कि इस हादसे से प्रभावित लोगों और कंपनियों कोशून्य ब्याज पर डॉलर लोन मुहैया कराएं.

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