म्यांमार में महँगाई में उछाल

हिंसक दमन के बावज़ूद लगातार तीखे प्रदर्शनों से जूझ रहे सैन्य प्रशासन ने म्यांमार की अर्थव्यवस्था को हुए गंभीर नुक़सान के बीच खाने पीने की चीज़ों और तेल की कीमतों में इजाफ़ा कर दिया है. संयुक्त राष्ट्र की फ़ूड ऐजेंसी ने कहा है कि तेल और खाने पीने की चीज़ों की क़ीमतों के बढ़ने ने ग़रीब लोगों की जिंदगी को कठिन बना दिया है.

- Khidki Desk


म्यांमार में वे परिवार जिनके सदस्य बीते दिनों में सैन्य तख़्तापलट के ख़िलाफ़ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सेना की हिंसा का शिकार होकर मारे गए हैं, अब अपने ऐसे परिजनों को याद करते हुए उनके अंतिम संस्कार और शोक सभा की तैयारी कर रहे हैं. सोमवार की शाम प्रदर्शनकारियों ने मोमबत्तियों के साथ शांति पूर्ण प्रदर्शन किया था.


मॉनिटरिंग ग्रुप Assistance Association for Political Prisoners ने कहा है कि रविवार को हुई हिंसा के दौरान मारे गए 74 लोगों में 3 बच्चे भी शामिल हैं, वहीं सोमवार को भी 20 लोगों की मौत प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई में हुई है.

इस बीच, म्यांमार के सैन्य प्रशासन ने डॉ. सासा नाम के एक व्यक्ति पर गंभीर राजद्रोह का आरोप लगाया है. डॉ. सासा, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर म्यांमार की असल सरकार के तौर पर मान्यता चाह रहे, अपदस्त कर दिए गए म्यांमार के सांसदों के एक संगठन, सीआरपीएच के अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं.


वे देश के बाहर किसी अज्ञात जगह से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर म्यांमार के सैन्य प्रशासन के अपदस्त करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें कर रहे हैं. डॉ. सासा के ख़िलाफ़ सेना ने म्यांमार की जनता को सिविल नाफ़रमानी के लिए उकसाने, म्यांमार पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने की वक़ालत करने और सेना का तख़्तापलट कर देने की कोशिशों के आरोप लगाए हैं.

इधर, भारी हिंसक दमन के बावज़ूद लगातार तीखे प्रदर्शनों से जूझ रहे सैन्य प्रशासन ने म्यांमार की अर्थव्यवस्था को हुए गंभीर नुक़सान के बीच खाने पीने की चीज़ों और तेल की कीमतों में इजाफ़ा कर दिया है. संयुक्त राष्ट्र की फ़ूड ऐजेंसी, World Food Programme (WFP) ने कहा है कि तेल और खाने पीने की चीज़ों की क़ीमतों के बढ़ने ने ग़रीब लोगों की जिंदगी को कठिन बना दिया है.


WFP ने कहा है कि खाने पीने की अलग अलग चीज़ों की क़ीमतों में अलग अलग जगहों पर 4 प्रतिशत से लेकर 35 प्रतिशत तक का भी इजाफ़ा हुआ है. वहीं तेल की क़ीमतें सैन्य तख़्तापलट के बाद से 15 प्रतिशत बढ़ गई हैं जिससे आने वाले समय में हर चीज़ की क़ीमतों में और अधिक उछाल की आशंका जताई जा रही है.