पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते चीन और रूस ने मिलाया हाथ

दक्षिणी चीन के नान्निंग शहर में चीन के विदेश मंत्री वांग यी और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक बैठक में दोनों देशों के ख़िलाफ़ पश्चिमी देशों की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों को अपने अंदरूनी मामलों में बाहरी दखलअंदाजी करार दिया है.

- Khidki Desk


मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के आरोपों में पश्चिमी देशों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों और आलोचना के बीच चीन और रूस के विदेश मंत्रियों ने मंगलवार को हुई बैठक में एकता दिखाई.


दक्षिणी चीन में स्थित नान्निंग शहर में सोमवार को हुई पहली बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी और रूसी विदेश मंत्री सर्जेई लावरोव ने एक संयुक्त बयान में ईयू और अमेरिका समेत कई देशों के उठाए कदमों को अपने अंदरूनी मामलों में बाहरी दखलअंदाजी करार दिया.


उन्होंने कहा कि वे जलवायु परिवर्तन से लेकर कोरोना वायरस महामारी तक के मुद्दों पर वैश्विक स्तर पर प्रगति के लिए काम कर रहे हैं.

इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका से ईरान परमाणु समझौते में फिर से शामिल होने का आग्रह किया. गौरतलब है कि रूस और चीन के तेहरान से नजदीकी संबंध हैं.


वांग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका की तरफ से चीनी अधिकारियों पर लगाए गए प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की.


चीन के शिनजियांग प्रांत में कथित तौर पर वीगर मसलमानों के मानवाधिकार के हनन के आरोपों में इन देशों ने प्रतिबंध लगाए थे जिसकी वांग के आलोचना की. उन्होंने कहा, “एकपक्षीय प्रतिबंधों के खिलाफ सभी देशों को साथ खड़ा होना चाहिए। यह कदम अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्वीकार्य नहीं हैं।”


वहीं वाशिंगटन और बीजिंग के बीच तल्ख होते रिश्तों और प्योंगयांग के कूटनीतिक तौर पर अलग-थलग पड़ने, वहां वित्तीय समस्याओं के की वजह से चीन पर बढ़ती उसकी निर्भरता के बीच चीन और उत्तरी कोरिया के नेता अपने पुराने संबंधों को और पुख्ता करने की दिशा में संवाद कर रहे हैं.


उत्तर कोरिया की आधिकारिक समाचार एजेंसी 'कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी यानी केसीएनए ने मंगलवार को कहा कि किम जोंग उन ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ हुई बातचीत में, 'विरोधी ताकतों के कारण पेश आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए चीन के साथ सहयोग को मजबूत करने की वकालत की है.


केसीएनए और चीन की शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के मुताबिक, शी ने किम को दिए संदेश में द्विपक्षीय संबंधों को दोनों देशों के लिए “कीमती संपदा” करार दिया और कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थायित्व के प्रति योगदान का संकल्प लिया.


दोनों नेताओं के बीच बात ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका के बाइडन प्रशासन ने उत्तर कोरिया के परमाणु खतरे से निपटने के लिए अपने एशियाई सहयोगी दक्षिण कोरिया और जापान के साथ सहयोग मजबूत करने के लिए राजनयिक प्रयास तेज कर दिए हैं.


कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह इस बात का संकेत है कि चीन जल्दी ही उत्तर कोरिया को खाद्य सामग्री से ले कर दूसरी और मदद दे सकता है जो महामारी के दौरान सीमाओं के बंद होने से रुक गई थी.


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