तिब्बत के युवाओं पर चीन का फ़ोकस

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने तिब्बत को लेकर एक नया बयान दिया है जिससे पता चलता है कि हॉंगकॉंग के बाद अब चीन तिब्बत को लेकर अपनी स्थिति और मज़बूत करना चाहता है. चीन के सरकारी मी​डिया के मुताबिक़ शी जिनपिंग ने चीन के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक बैठक में कहा है कि चीन को तिब्बत में स्थिर​ता क़ायम करने और राष्ट्रीय एकता को बरक़रार रखने के लिए एक 'अभेद्य दुर्ग' बनाने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि इसके लिए अलगाववाद के ख़िलाफ़ तिब्बत की जनता को शिक्षित करना होगा.

- Khidki Desk

हॉंगकॉंग में नया राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लागू कर वहां कि अलगाववादी ताक़तों पर नकेल कसने के बाद चीन का ध्यान अब तिब्बत में अपनी स्थिति को और मज़बूत करने की ओर दिखाई दे रहा है. सरकारी मीडिया एजेंसी ज़िन्हुआ के मुताबिक़ राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इसकी ओर चीनी वरिष्ठ नेताओं को संबोधित करते हुए इशारा किया है.


तिब्बत के भविष्य और प्रशासन को लेकर कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई एक बैठक में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने तिब्बत के अधिकारियों की उनके कामों के लिए सराहना की और कहा कि राष्ट्रीय एकता को और अधिक समृद्ध और मज़बूत बनाने के लिए और अधिक का​म किए जाने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता को लेकर समझदारी का एक 'अभेद्य दुर्ग' बनाने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि इसके लिए 'अलगाववाद' के ख़िलाफ़ और राष्ट्रीय एकता के लिए तिब्बत की जनता को शिक्षित करना होगा.


जिन्हुआ में प्रकाशित एक रिपेार्ट के मुताबिक शी जिनपिंग ने कहा

''इसके लिए तिब्बत के स्कूलों में राजनीतिक और विचारधारात्मक शिक्षा को और मज़बूत करना होगा, ताकि हर एक नौजवान के दिलों की गहराई तक चीन के प्रति प्रेम के बीजों को रोपा जा सके.''

1949 की चीनी क्रांति के तुरंत बाद 1950 में चीनी सेना ने तिब्बत में दाख़िल होकर वहां दलाई लामा के धार्मिक शासन का अंत कर दिया था. दलाई लामा को अपने समर्थकों के साथ तिब्बत छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी. चीन इस ​परिघटना को तिब्बत की जनता की एक 'शांतिपूर्ण मुक्ति' कहता है जिसने हिमालय के इस दुर्गम इलाक़े को उसकी सामंती अतीत और बेड़ियों से मुक्त कराया. वहीं निर्वासित तिब्बती धार्मिक नेता दलाई लामा, उनके समर्थक और चीन के आलोचक इसे तिब्बती जनता का दमन और 'सांस्कृतिक जनसंहार' बताते हैं.


शी जिनपिंग ने इस बैठक में कहा कि तिब्बत में कम्युनिस्ट पार्टी की भूमिका मज़बूत करने और मूलनिवासी जातीय समूहों को बेहतर ढंग से एकीकृत करने की आवश्यकता है. इसी सिलसिले में उन्होंने कहा

''हमें एकजुट, समृद्ध, सभ्य, सामंजस्यपूर्ण, सुंदर, आधुनिक और समाजवादी तिब्बत बनाने का संकल्प लेना होगा.''

उन्होंने कहा कि तिब्बती बौद्धों को भी ज़रूरत है कि वे समाजवाद और चीनी शर्तों के अनुसार ख़ुद को ढालें.


लेकिन आलोचकों का कहना है कि अगर चीन के शासन से तिब्बत को वाकई इतना फायदा हुआ होता, जितना शी जिनपिंग ने बैठक में दावा किया, तो चीन को अलगाववाद का डर नहीं होता और ना ही चीन तिब्बत के लोगों में शिक्षा के ज़रिए नई राजनीतिक चेतना भरने की बात करता.


भारत से सरहद पर तनाव के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक नए आधुनिक समाजवादी तिब्बत के निर्माण की कोशिश करने का आह्वान किया है. इससे पहले चीन के विदेश मंत्री ने वांग यी ने तिब्बत का दौरा किया था और भारत से लगी सीमा पर निर्माण कार्यों की जायजा लिया था. चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और चीन के केंद्रीय सैन्य आयोग के चेयरमैन शी जिनपिंग ने बीजिंग में तिब्बत को लेकर हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में यह टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि चीन को तिब्बत में स्थिरता बनाए रखने और राष्ट्रीय एकता की रक्षा करने के लिए और कोशिशें करने की जरूरत है.

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