चीन का 'क्वेश्चन टू हैवेन' लॉंच

चीन का यह प्रोब, मंगल ग्रह के वातावरण, उसकी सतह का निरीक्षण करने के लिए कई वैज्ञानिक उपकरणों को ले जा रहा है, जो वहाँ पानी और बर्फ की मौजूदगी को खोजेंगें.

- Khidki Desk


चीन ने अपने पहले स्वतंत्र मिशन को मंगल पर भेज दिया है, जो कि चीन के लिए अंतरिक्ष में वैश्विक नेतृत्व और तकनीकी प्रगति में मददगार होगा. गुरुवार को भारतीय समय के अनुसार 10 बजकर 11 मिनट पर, चीन का यह सबसे बड़ा मिशन दक्षिणी द्वीप प्रांत हैनान के वेनचांग स्पेस लॉन्च सेंटर से जांच के साथ लॉंच हुआ.


मिशन के फरवरी में मंगल तक पहुंचने की उम्मीद है, यह मिशन 90 दिनों के लिए ग्रह का पता लगाने के लिए रोवर को तैनात करने का प्रयास करेगा. इस मिशन को तियानवेन -1, या "क्वेश्चन टू हैवेन" के नाम से भी जाना जाता है.


अभी तक अमेरिका, यूरोप और भारत के आठ अंतरिक्ष मिशन मंगल ग्रह की परिक्रमा कर रहे हैं या इसकी सतह पर अन्य मिशनों के तहत नियोजित हैं. यह मिशन मंगल ग्रह पर एक रोवर को तैनात करेगी, जिसे नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) द्वारा लाल ग्रह पर भेजे गए सबसे बड़े, सबसे भारी, सबसे उन्नत वाहन कहा जाएगा.


चीन का यह प्रोब, मंगल ग्रह के वातावरण, उसकी सतह का निरीक्षण करने के लिए कई वैज्ञानिक उपकरणों को ले जा रहा है, जो वहाँ पानी और बर्फ की मौजूदगी को खोजेंगें. चीन ने पहले रूस के साथ 2011 मंगल ग्रह के सिए मिशन भेजा था जो सफल नहीं हो सका था.

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