कोरोना संक्रमण : तीसरे पायदान पर भारत, रूस को छोड़ा पीछे

भारत में कोरोना वायरस का पहला मामला 30 जनवरी को सामने आया था, और आज यानी 6 जुलाई को भारत दुनिया में कोरोना से प्रभावित देशों में तीसरे स्थान पर आ गया है. यहां संक्रमितों की कुल तादात 6,97,836 जा पहुंची है.

- प्रीति नहार

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भारत में कोरोना वायरस का पहला मामला 30 जनवरी को सामने आया था, और आज यानी 6 जुलाई को भारत दुनिया में कोरोना से प्रभावित देशों में तीसरे स्थान पर आ गया है.


worldometers.info की वेबसाइट के मुताबिक़ यहां संक्रमितों की कुल तादात 6,97,836 जा पहुंची है.


भारत सरकार ने पहला मामला दर्ज होने के लगभग 2 महीने बाद यानी 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का एलान किया. प्रधानमंत्री ने यह ऐलान करते हुए कहा -


"आज प्रत्येक देशवासी से एक और समर्थन मांग रहा हूं. ये है जनता कर्फ्यू. यानि जनता के लिए जनता द्वारा ख़ुद पर लगाया गया कर्फ्यू. इस रविवार यानि दो दिन के बाद 22 मार्च को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक सभी देश वासियों को जनता कर्फ्यू का पालन करना है."

इस ऐलान के वक़्त भारत में कोरोना के मामले 300 पार पहुँच चुके थे. इसके बाद भारत में कोरोना के बचाव के लिए बिना किसी तैयारी के पूरी तरह लॉक डाउन की घोषणा कर दी गई. इससे जो अफ़रा तफ़री मची उसके बीच भी कोरोना संक्रमण तेज़ी फैलता रहा. लॉक डाउन ने कोरोना संक्रमण की रफ़्तार जितनी तेज़ हो सकती थी उसे तो संभवत: कुछ हद तक रोका होगा लेकिन ख़ासकर महानगरों में कम आय वर्ग के लोगों के बीच जो आशंका और अफ़रा तफ़री फ़ैली उसमें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना संभव नहीं रहा.


एक तरफ जहाँ भारत में कोरोना का क़हर था तो दूसरी ओर लॉक डाउन की वजह से देश की इकॉनमी को क़ाफ़ी नुक़सान भी पहुँचा. कई लोगों के रोज़गार छिने, नौकरियां गईं और इसी परेशानी के चलते लॉक डाउन में लाखों की संख्या में मजदूरों को पलायन करना पड़ा, जिनकी आ​जीविका हर रोज़ कमा कर खाने की थी.


ऐसे में कोरोना के संक्रमण के फ़ैलने का ख़तरा भी लगातार छाया रहा. दूसरी तरफ अस्पतालों में कोरोना की जांच के लिए कहीं पीपीई किट्स की कमी पड़ी तो कहीं कोरोना संक्रमित मरीज़ों के लिए बेड्स की कमी सामने आयी.


इस बीच संक्रमण बढ़ता रहा और प्रधानमंत्री लॉकडाउन की अवधि को बार बार आगे बढ़ाते रहे. हालांकि बाज़ार के पस्त हो जाने के बाद सरकार की समझ आया कि यह रास्ता और अधिक समय के लिए नहीं अपनाया जा सकता. अब लॉकडाउन को चरण बद्घ तरीक़े से खोलने की कवायद शुरू हुई.


देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 24,248 नए मामले सामने आए हैं. इस दौरान 425 लोगों की मौत हुई है. राजधानी दिल्ली इस वक़्त सबसे बुरी तरह प्रभावित है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार दिल्ली में 97,000 मामलों के साथ तक़रीबन 3004 लोगों की मौत हो चुकी है.


पूरे देश में कोरोना के दर्ज मामले 6 लाख 97 हज़ार 836 तक पहुँच गए हैं. साथ ही 19,700 लोगों की मौत हो चुकी है और भारत कोरोनासंक्रमण के मामलों में तीसरे पायदान पर आ पहुंचा है.


हालांकि इधर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते मंगलवार को कहा कि देश को घबराने की जरुरत नहीं, हम पूरी दुनिया में कोरोना की लड़ाई में सबसे बेहतर स्थिति में है -


"सांथियो यह बात सही है कि अगर कोरोना से होने वाली मृ​त्यु दर को देखें तो दुनिया की अनेक देशों की तुलना में भारत सम्हली हुई स्थिति में है. समय पर किए गए लॉकडाउन और अन्य फ़ैसलों ने भारत में लाखों लोगों का जीवन बचाया है."

प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान की भरपूर आलोचना भी हुई. सवाल यह भी उठ रहे हैं कि भारत में पर्याप्त मात्रा में टैस्टिंग नहीं कराई जा रही और सही आंकड़ों को छिपाया जा रहा है जबकि संक्रमण और मौतों की असल संख्या बताए जा रहे आंकड़ों से कई अधिक है.


इधर अमेरिका और ब्राजील में हालात और भी भयानक है. अमेरिका में इस वक्त 29,82,928 मामले दर्ज हैं और 1,32,569 लोगों की मौतें हो चुकी है. जबकि दूसरे स्थान पर मौजूद ब्राज़ील में 16,04,585 मामलों के साथ 64,900 लोगों की मौत हो चुकी है.

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