Covid-19​ ने बढ़ाया Gender-Gap​ का दायरा

कोरोनावायरस के प्रकोप के बाद बने हालात में अब महिलाओं को तकरीबन हर क्षेत्र में पुरुषों से बराबरी करने के लिए 135.6 साल का इंतजार करना पड़ सकता है.

- Khidki Desk

World Economic Forum ने अपनी एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि कोरोनावायरस ने जैंडर गैप को तक़रीबन एक और पीढ़ी तक के लिए बढ़ा दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं को समग्र रूप से पुरूषों की बराबरी में आने के लिए अब 135.6 साल और इन्तज़ार करना पड़ेगा जबकि अब तक का मानना यह था कि इस स्थिति को 2020 के बाद से 99.5 सालों में पाया जा सकेगा.


World Economic Forum की एक ताज़ा रिपोर्ट का कहना है कि कोरोना वायरस महामारी ने जैंडर गैप को एक पीढ़ी के लिए बढ़ा दिया है. इसका मतलब यह है कि सदियों से मानव समाज में पुरूषों के मुक़ाबले पिछड़ी रही महिलाओं को बराबरी हासिल करने के लिए और अधिक लंबे समय तक चुनौतियों से जूझना होगा.


कोरोना महामारी के प्रकोप से पहले यह अनुमान लगाया गया था कि सभी क्षेत्रों में पुरुषों के मुक़ाबले बराबरी हासिल करने के लिए महिलाओं 2020 के बाद से 99.5 सालों का वक़्त लगेगा. लेकिन अब इस रिपोर्ट का कहना है कि कोरोनावायरस के प्रकोप के बाद बने हालात में यह समया​वधि और बढ़ गई है. अब महिलाओं को तकरीबन हर क्षेत्र में पुरुषों से बराबरी करने के लिए 135.6 साल का इंतजार करना पड़ सकता है.


रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर में नीतिनियंताओं को इस चुनौती को समझना होगा और इससे निपटने के लिए सचेत और पुरज़ोर ​कोशशें करनी होंगी.


यह​ रिपोर्ट अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाओं और पुरुषों के बीच असमानताओं की पड़ताल करती है. इसमें आर्थिक सहभागिता और अवसर, शिक्षा हासिल करने के अवसर, स्वास्थ्य के हालात और राजनीतिक सशक्तिकरण जैसे मसलों को ध्यान में रखा गया है.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की मैनेजिंग डायरेक्टर, सादिया ज़ाहिदी ने कहा कि बराबरी के लक्ष्य को पाने के लिए देशों के नेताओं को सार्थक और समर्पित तरीक़े से काम करना होगा. रिपोर्ट कहती है कि राजनीतिक असमानता को ख़त्म करने में 145.5 साल लगेंगे. रिपोर्ट में 156 देशों की 26.1 फीसदी संसदीय सीटों का आकलन किया गया, जिसमें पाया गया कि सिर्फ 22.6 फीसदी महिलाएं सरकारों में मंत्री हैं. इन देशों में से आधे से ज्यादा यानी 81 देशों में कभी महिला राष्ट्राध्यक्ष नहीं बनीं.


आर्थिक मोर्चे पर देखें तो बराबरी करने में 267.6 साल लग जाएंगे. हालांकि महिलाओं में कौशल आधारित प्रोफेशनल्स की तादाद बढ़ी है, लेकिन वेतन में असमानता और मैनेजर या वरिष्ठ पदों पर महिलाओं की कमी जैसी समस्या बड़े पैमाने पर देखी गई है.


रिपोर्ट के मुताबिक मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के देशों में सबसे ज्यादा जेंडर गैप देखने को मिला.वहीं दक्षिण एशिया इस मामले में दूसरे स्थान पर है.इन जगहों पर पिछले एक साल में जेंडर गैप में सुधार की प्रक्रिया लगभग उल्टी दिशा में जा रही है. उत्तरी यूरोप के देश इस मामले में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. जेंडर गैप को कम करने में आइसलैंड 89.2 फीसदी, फिनलैंड 86.1 फीसदी और नार्वे 84.9 फीसदी व्रद्धि के साथ शीर्ष पर बने हुए हैं.