विकसित देशों को कोरोना वैक्सीन के लिए चुकाना होगा मोटा दाम

अमेरिकी दवा कंपनी फ़िज़र ने साफ़ किया है कि इस मामले में बाक़ी विकसित देशों को कोई रियायत नहीं मिलेगी और उन्हें कोरोना वैक्सीन के लिए अमेरिका जितना ही दाम चुकाना होगा.

- Khidki Desk


अमेरिकी दवा कंपनी फ़िज़र ने ये साफ़ कर दिया है कि दुनिया के बाक़ी विकसित देशों को कोरोना वैक्सीन के लिए उतना ही दाम चुकाना होगा जितना दाम पिछले हफ़्ते हुए एक कांट्रेक्ट में अमेरिका ने चुकाना तय किया है.


कंपनी ने साफ़ किया है कि इस मामले में बाक़ी विकसित देशों को कोई रियायत नहीं मिलेगी और उन्हें कोरोना वैक्सीन के लिए अमेरिका जितना ही दाम चुकाना होगा.


बता दें कि पिछले हफ़्ते अमेरिका ने अमेरिकी दवा कंपनी फ़िज़र और जर्मनी की बायोटेक कंपनी बॉयोएनटेक की ओर से विकसित की जा रही कोरोना वायरस वैक्सीन के लिए लगभग 200 करोड़ डॉलर का कॉन्ट्रेक्ट साइन किया है.


माना जा रहा है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कोरोना की वैक्सीन बनाने में जुटी कंपनियों के लिए भी इस कीमत से नीचे जाना संभव नहीं होगा. जानकार मान रहे हैं कि ये कांट्रेक्ट एक तरह से कोरोना वैक्सीन के लिए एक मानक दाम तय करने की कोशिश है और हर दवा कंपनी इसी को आधार बनाकर कोरोना के वैक्सीन को बेचने की कोशिश करेगी.


न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की खबर के अनुसार, कोरोना वायरस के वैक्सीन के लिए यूरोपीय संघ समेत उसमें शामिल सदस्य देश फ़िज़र के साथ बातचीत कर रहे हैं. वहीं इस ख़बर के आने के साथ ही जानकारों की वे आशंकाएं सच होती लग रही हैं जिनमें कहा गया था कि कोरोना वायरस की वैक्सीन को दुनिया की बड़ी और ग़रीब आबादी तक पहुंचाना चुनौती होगी.

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