ग्रैंड रेनेसां डैम पर सुलझने लगा विवाद?

इथियोपिया की टाना झील से निकलने वाली ब्लू नील नदी इथियोपिया, मिस्र और सूडान, तीनों देशों के लिए पानी का सबसे अहम स्रोत है लेकिन इथियोपिया नदी की अपस्ट्रीम में ही ग्रैंड रेनेसां डैम बनाकर पानी को रोक रहा है जिस पर नदी के डाउनस्ट्रीम में बसे मिस्र और सूडान को एतराज़ है.

- Khidki Desk


अफ़्रीकी देश, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा है कि इथियोपिया, मिस्र और सूडान, विवादित इथियोपियाई रेनेसां बांध परियोजना के बारे में एक ऐसी आपसी समझदारी बनाने में कामयाब हुए हैं जिससे जल्द ही ये देश एक ठोस समझौते पर पहुंच जाएंगे.


इथियोपिया की इस महत्वाकांक्षी बांध परियोजना को लेकर इन पड़ो​सी देशों में तनाव बढ़ा हुआ है और सैन्य टकराव तक हालात बनने की आशंका पैदा हो गई है.


इथियोपिया की टाना झील से निकलने वाली ब्लू नील नदी इन तीनों देशों के लिए पानी का सबसे अहम स्रोत है लेकिन इथियोपिया नदी की अपस्ट्रीम में ही ग्रैंड रेनेसां डैम बनाकर पानी को रोक रहा है जिस पर नदी के डाउनस्ट्रीम में बसे मिस्र और सूडान को एतराज़ है.


इथियोपिया की इस बांध परियोजना के ज़रिए अफ़्रीका में सबसे बड़ा पावर सप्लायर बनने की महत्वाकांक्षा है और उसका दावा है कि इस बांध परियोजना से उसके देश में लाखों लोगों को रोज़गार मिलेगा. वहीं मिस्र और सूडान जो कि पानी के लिए ब्लू नील नदी पर ही निर्भर है इस बात को लेकर आशंकित हैं कि उनके देश की जनता पानी की कमी से एक भयानक संकट में फंस जाएगी.


हालांकि डैम अभी पूरा नहीं बना है लेकिन ​इथियोपिया ने ब्लू नील नदी को रोक कर इस बांध में पानी भरना शुरू कर दिया था. इथियोपिया ने कहा था कि बांध को भरा जाना बांध निर्माण की ​प्रक्रिया का एक स्वाभाविक हिस्सा है. हालांकि भारी बरसात के चलते ब्लू नील नदी में बढ़े जल स्तर के चलते बांध क़ाफ़ी हद तक पहले ही भर चुका है.


इधर नए बयान में अब कहा गया है कि बांध को भरे जाने को लेकर तीनों देशों के नेता अग्रिम तकनीकी चर्चा को लेकर सहमत हुए हैं.. और एक व्यापक समझौते की ओर आगे बढ़ रहे हैं.


इन तीनों देशों के बीच इस बांध को लेकर कई दौर की चर्चाओं के असफल हो जाने के बाद अब एफ़्रिकन यूनियन की मौजूदा अध्यक्षता कर रहे दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफ़ोसा की मध्यस्थता में फिर एक बैठक चल रही है. मंगलवार को हुई चर्चा के बारे में इथियोपिया की ओर से इससे अधिक जानकारी नहीं दी गई है.


लेकिन बयान में दिए गए संकेतों से लग रहा है कि तीनों देश अब किसी समझौते में पहुंच पाएंगे.