कैमरे के एक युग का अंत

सबसे बड़े कैमरा ब्रॉंड्स में से एक, जापानी कंपनी ओलिंपस ने बुधवार को एक बयान जारी करते हुए कहा है कि उसने भरपूर कोशिश की कि किसी तरह वह इसे चालू रख पाए लेकिन अब डिज़िटल कैमरा बाज़ार में मुनाफ़े नहीं बचा. ओलिंपस पिछले तीन सालों से लगातार घाटा झेल रही थी.

- Khidki Desk


एक दौर में अपने कैमरों के लिए मशहूर रहे दुनिया के सबसे बड़े कैमरा ब्रॉंड्स में से एक ओलिंपस ने अपने कैमरा डिविजन को बेचने का फ़ैसला किया है. पिछले तीन सालों से लगातार भारी घाटा झेल रहे इस डिविज़न को बेचने के इस फ़ैसले को एक युग के ख़त्म होने जैसा कहा जा रहा है.


इस जापानी कंपनी ने बुधवार को एक बयान जारी करते हुए कहा है कि उसने भरपूर कोशिश की कि किसी तरह वह इसे चालू रख पाए लेकिन अब डिज़िटल कैमरा बाज़ार में मुनाफ़े नहीं बचा. ओलिंपस पिछले तीन सालों से लगातार घाटा झेल रही थी.


असल में स्मार्टफ़ोन्स में आ गए आसान और अत्याधुनिक कैमरा विकल्पों ने डिजिटल कैमरा बाज़ार को पूरी तरह सिकोड़ दिया है. जो परिणाम डीएसएलआर जैसे भारी और महंगे कैमरे क़ाफ़ी कैमरा तकनीकें सीखने के बाद देते हैं, उसी तरह के परिणाम छोटे से मोबाइल स्मार्टफ़ोन्स में आसानी से आ जाते हैं. ऐसे में लोग महंगे कैमरों के बजाय अच्छे ​फ़ीचर्स वाले फ़ोन्स ख़रीदना पसंद कर रहे हैं.


ओलिंपस ने अपना सबसे पहला कैमरा 1936 में लॉंच किया था. उसके बाद दशकों तक वह इस व्यापार में शीर्ष की चुनिंदा कंपनियों में एक रही. 1970 का दशक इसके उभार का चरम था. ओलिंपस ने आकार में छोटे, हल्के वज़न वाले ख़ूबसूरत कैमरों की कई रेंज निकाली जिन्हें प्रोफ़ेश्नल फ़ोटोग्रॉफ़र्स के साथ ही शौकीनों ने भी बहुत पसंद किया.


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