'अब बहुत हो चुका'

अमेरिका में पोर्ट्समाउथ शहर के प्रदर्शनकारियों ने अपील की है कि ऐसे अमेरिकी जनरल्स के नाम पर रखे गए अमेरिकी मिलिट्री बेसों के नामों को भी बदला जाए जिनके नामों के साथ नस्लभेद का इतिहास जुड़ा है. अमेरिकी गृहयुद्घ के दौरान इन जनरलों पर अमेरिका के दक्षिणी राज्यों में काले ग़ुलाम लोगों के शोषण के आरोप हैं.

- भारती जोशी




अमेरिकी कॉंग्रेस में पेश हुए ज्यॉर्ज फ्लॉइड के भाई फ़िलॉनिस फ्लॉइड ने पुलिस क्रूरता पर सुधार क़ानून को पारित करने की अपील की है. उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व का आह्वाहन करते हुए कहा कि उनके पास मौका है कि वे ज्यॉर्ज फ्लॉइड की मौत को व्यर्थ ना जाने दें. उन्होंने कहा—


“उस दिन ज्यॉर्ज किसी को चोट नहीं पहुंचा रहा था. महज 20 डॉलर्स के लिए उसे नहीं मारा जाना चाहिए था. मैं आपसे पूछता हूं क्या 20 डॉलर एक काले आदमी की जान की क़ीमत है? 20 डॉलर्स? यह 2020 चल रहा है. बर्दाश्त की भी हद होती है. जो लोग सड़कों पर मार्च कर रहे हैं वे आप लोगों से यही कह रहे हैं. इनफ़ इज़ इनफ़.. अब बहुत हो चुका. हमारे देश के नेता बनिए. दुनिया को ऐसी चीज़ें चाहिए जो सही हों. लोगों ने आप लोगों को चुना है उनके हक़ में बोलने के लिए, सकारात्मक बदलावों को लाने के लिए. ज्यॉर्ज का नाम कोई मतलब रखता है. आप लोगों के पास यहां एक मौक़ा है अपने नामों को कोई मतलब दे पाने का. अगर उसकी मौत दुनिया की भलाई के लिए कोई बदलाव ला पाती है, और मेरा यक़ीन है वह लाएगी ही, तो उसका मतलब होगा कि वह वैसे ही मरा जैसे वह जिया था. और सिर्फ आप ही लोग वो हैं जो यह तय करेंगे कि उसकी मौत व्यर्थ ना जाए. मुझे अपने भाई को आख़िरी बार विदा कहने का मौका नहीं मिला जब वो यहां था. मुझसे वह मौका लूट लिया गया.. लेकिन मुझे मालूम है वह नीचे हमें देख रहा होगा. पैअरी देखो मेरे बड़े भाई तुमने क्या कर डाला है, तुमने दुनिया को बदल डाला है.. शुक्रिया तुम्हारा जो कुछ तुमने किया उसके लिए.”

ज्यॉर्ज फ्लॉइड के भाई फ़िलॉनिस फ्लॉइड के शब्द.


इधर दुनियाभर में नस्लवाद के​ ख़िलाफ़ उभरे आंदोलनों के क्रम में आंदोलनकारियों ने ऐसी मूर्तियों और स्मारकों को भी निशाना बनाया है जो कि नस्लभेद की प्रतीक हैं. इसी सिलसिले में अमेरिका में पोर्ट्समाउथ शहर के प्रदर्शनकारियों ने अपील की है कि ऐसे अमेरिकी जनरल्स के नाम पर रखे गए अमेरिकी मिलिट्री बेसों के नामों को भी बदला जाए जिनके नामों के साथ नस्लभेद का इतिहास जुड़ा है. अमेरिकी गृहयुद्घ के दौरान इन जनरलों पर अमेरिका के दक्षिणी राज्यों में काले ग़ुलाम लोगों के शोषण के आरोप हैं.


हालांकि इसके जवाब में ट्रंप ने ट्वीट करते हुए उन्होंने कहा है ​कि वे इन नामों को बदलने के बारे में सोचेंगे भी नहीं. उन्होंने इन्हें महान अमेरिकी विरासत और जीतों का हिस्सा बताया है.


उन्होंने लिखा, "संयुक्त राज्य अमेरिका ने इन हैलोड ग्राउंड्स में हमारे हीरोज़ को प्रशिक्षित और तैनात किया है, और दो विश्व युद्ध भी जीते हैं. इसलिए, मेरा प्रशासन भी इन शानदार और सक्षम सैन्य प्रतिष्ठानों के नाम को बदलने के बारे में कभी सोचेगा भी नहीं। "दुनिया में सबसे महान राष्ट्र के रूप में हमारे इतिहास के साथ छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। हमारे सेनाओं का सम्मान करें!"


इससे पहले नस्लवाद के विरोध में दुनियाभर के अलग अलग शहरों में प्रदर्शनकारियों ने कई मुर्तियों को निशाना बनाया और कई जगह शहरों के प्रशासन ने ख़ुद विवादित मूर्तियों को हटा लिया.


इधर ऑस्ट्रेलियाई पुलिस, ब्लैक लाइव्स मैटर आन्दोलन के समर्थन में उतरे लोगों को गिरफ़्तार करने की चेतावनी दे रही है. पुलिस के अनुसार अगर लोग ब्लैक लाइव्स मैटर अन्दोलन के समर्थन में सार्वजनिक रैलियों में भाग लेते हैं और अगर वे सामाजिक सुरक्षा प्रतिबंधों को तोड़ते हैं तो उनकी गिरफ्तारी की जाएगी.


बता दें कि आस्ट्रेलिया में हजारों लोगों ने पिछले हफ़्ते कई रैलियों में भाग लिया था और शुक्रवार को आस्ट्रेलिया में और अधिक विरोध प्रदर्शनों के आयोजन की योजना है. बता दे कि आस्ट्रेलिया में ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन का समर्थन आस्ट्रेलियाई आदिवासियों के लिए का चिकत्सकीय सुविधाएँ न होने और ज्यादा मौतों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए किया जा रहा है.


इधर ब्रिटेन, स्काटलैंड, होन्गकोंग, आस्ट्रेलिया और दुनिया की अन्य जगहों से ब्लैक लाइव्स मैटर आन्दोलन को समर्थन मिलने के बाद अब एम्स्टर्डम में भी हज़ारों लोगो ने ब्लैक लाइव्स मैटर आन्दोलन को अपना समर्थन दिया है. एम्स्टर्डम के एक पार्क में ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन के समर्थन में हजारों लोगों ने दक्षिण अफ्रीकी रंगभेद विरोधी आइकन नेल्सन मंडेला के नाम पर प्रदर्शन किया.

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