महिलाओं की तन्ख़्वाह का अंतर ख़त्म करने के लिए EU की ख़ास पहल की तैयारी

इसका मक़सद यह है कि स्टाफ़ के अन्य सदस्यों की तन्ख़्वाह की जानकारी रखने से महिलाओं के लिए वेतन की असमानता को चुनौती देना और जैंडर पे गैप को ख़त्म कर पाना आसान होगा.

- Khidki Desk

यूरोप में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की तन्ख़्वाह के अंतर को ख़त्म करने के लिए यूरोपीय यूनियन की एक्जिक्यूटिव ब्रांच की ओर से पहल की जा रही है जिसमें नियोक्ता अपने स्टाफ़ को दी जाने वाली तन्ख़्वाह के बारे में सार्वजनित तौर पर बताना होगा.


इसका मक़सद यह है कि स्टाफ़ के अन्य सदस्यों की तन्ख़्वाह की जानकारी रखने से महिलाओं के लिए वेतन की असमानता को चुनौती देना और जैंडर पे गैप को ख़त्म कर पाना आसान होगा.


यूरोपयिन यूनियन कमिशन की अध्यक्ष उर्सुला फॉ़न डेल लेयेन ने इस बारे में बताते हुए कहा, ''समान वेतन के लिए आपको पारदर्शिता की ज़रूरत है. महिलाओं को यह मालूम होना चाहिए कि क्या उनके नियोक्ता उनके साथ सही व्यवहार करते हैं कि नहीं.''


हालांकि यूरोपीय यूनियन के 27 देशों में जैंडर पे गैप पहले की तुलना में कम हो कर अब 14 प्रतिशत तक आ गया है, लेकिन यूरोपियन यूनियन की इस पहल का मक़सद असमानता को पूरी तरह ख़त्म करने के लिए कुछ ख़ास नियम लागू करना है.


यूरोपियन यूनियन ने 1957 में जब European Economic Community के तौर पर आकार लिया, तो यूरोपीय देशों ने उस वक़्त ही इस तरह के लैंगिक विभेद को ख़त्म करने के लिए क़मर कसने की बात कही थी लेकिन इसके लिए हुई कोशिशों की रफ़्तार बीते दशकों में बेहद धीमी रही. अगर पेंशन के अधिकार, काम करने के हालात जैसी चीज़ों को ध्यान में रखा जाए तो अब भी जैंडर गैप 30 प्रतिशत तक है।

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