सब कुछ बिकाऊ नहीं है मि. ट्रंप !!!

डोनल्ड ट्रंप ने डेनमार्क के लिए अपनी विजिट कैंसिल कर दी है। वो डेनमार्क से ग्रीनलैंड खरीदना चाहते थे लेकिन उनके प्रस्ताव को डेनमार्क ने एब्सर्ड करार दिया है। इसके बाद मि. ट्रंप आहत हो गए और उन्होंने डेनमार्क के लिए अपनी विजिट कैंसिल कर दी है।

- कबीर संजय

PC: Financial Times

उत्तरी ध्रुव के पास ग्रीनलैंड एक बहुत विशालकाय द्वीप है। इसका ज्यादातर हिस्सा बर्फ से ढका और निर्जन है। यह डेनमार्क के अंतर्गत एक स्वायत्तशासी प्रदेश है। मि. ट्रंप को तो आप जानते ही हैं। बहुत बड़े पूंजीपति हैं। इस समय दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति भी हैं। तो उनके शौक भी बड़े हैं। वैसे भी शौक बड़ी चीज है।

कुछ दिनों से वे ग्रीनलैंड खरीदने के चक्कर में लग रहे थे। हाल ही में उनकी यूरोप यात्रा के दौरान डेनमार्क ने भी उन्हें अपने यहां आमंत्रित कर लिया था। इसके बाद वे सितंबर महीने के पहले सप्ताह में वहां जाने वाले थे। उन्हें लगा कि जब डेनमार्क जा ही रहे हैं तो लगे हाथ ग्रीनलैंड का सौदा भी तय कर आएंगे। उन्हें ग्रीनलैंड की जमीन के नीचे से धातुओं का भंडार हाथ लगने की उम्मीद है। उन्हें उम्मीद थी कि ग्रीनलैंड के जरिए अमेरिका की सुपरमेसी और मजबूत हो जाएगी। रूस भी काबू में रहेगा।

लेकिन, डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे को ही एब्सर्ड करार दिया है। इससे राष्टपति जी आहत हो गए। उन्होंने विजिट कैंसिल की। हेकड़ी भी पूरी साफ दिख रही है। ट्रंप का कहना है कि अगर उन्हें नहीं बेचना था तो साफ न कह देतीं। हम इस दिशा में नहीं बढ़ते। लेकिन, इस तरह से बात कहना ठीक नही है। आखिर वो ट्रंप से नहीं अमेरिका के राष्ट्रपति से बात कर रही थीं।

मतलब, ट्रंप जिसके चाहे घर में घुसकर उसका दाम लगाएं और वो आदमी मना पूरी इज्जत से करे।

खैर, इस प्रक्रिया में ग्रीनलैंड की धरती तबाह होने से फिलहाल बच गई। कारपोरेट की बुरी नजर जिस भी धरती पर पड़ती है, वह सूखी, कंगाल और बर्बाद हो जाती है। अभी तक के सारे अनुभव यही बताते हैं।



(तस्वीर इंटरनेट से। नक्शे पर ग्रीनलैंड)