• Rohit Joshi

ढहाए जा रहे नस्लभेद के बुत

अगर निर्णायक तौर पर दुनियाभर के अलग अलग शहरों से काले लोगों की ग़ुलामी के और भी प्र​तीकों को ज्यॉर्ज फ्लाइड की ​हत्या के ख़िलाफ़ उभरे आंदोलनों के बाद हटाया जाता है तो यह इस आंदोलन की एक और ऐतिहासिक सफलता होगी.

- रोहित जोशी




मंगलवार को ब्रिटेन की राजधानी लंदन के एक म्यूज़ियम लंदन डॉकलेंड्स के बाहर लगी 18 वीं सदी के ग़ुलामों के व्यापारी रॉबर्ट मिलीगन की मूर्ति को शहर के अधिकारियों ने क्रेन की मदद से नीचे उतार दिया. यह क़दम इसलिए उठाया गया क्योंकि, अमेरिका में ज्यॉर्ज फ्लॉइड की हत्या के बाद दुनिया भर में नस्लवाद के ख़िलाफ़ उभरे आंदोलन के बाद स्थानीय लोगों को इस मूर्ति के यहां लगे रहने से एतराज़ था.


इससे पहले ब्रिटिश शहर ब्रिस्टल में उभरे नस्लवाद विरोधी आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने रविवार को 17वीं सदी के ग़ुलामों के एक व्यापारी एडवर्ड कोल्स्टन की मूर्ति को ढहा दिया और फिर उसे नदी में फेंक दिया. इसी दिन ब्रसेल्स में बेल्ज़ियम के पूर्व राजा लेओपोल्ड द्वितीय की मूर्ति पर भी प्रदर्शनकारी चढ़ बैठे और उन्होंने नस्लवाद के ख़िलाफ़ नारे लगाए. एहतियातन बेल्ज़ियम के शहर Antwerp में अधिकारियों ने अब क्रेन से राजा की मूर्ति को नीचे उतार दिया है. लेओपोल्ड ने अफ़्रीकी देश कॉंगो में 1885 में नियंत्रण हासिल किया था और वहां कई काले लोगों को ग़ुलाम बनाकर बेगारी करवाई. आरोप हैं कि लेओपोल्ड के दमनपूर्ण शासन के दौरान तक़रीबन एक करोड़ कोंगोवासी मारे गए.


ज्यॉर्ज फ्लॉइड की हत्या के बाद उभरे आंदोलन ने पूरी दुनिया में नस्लवाद के ख़िलाफ़ जो एक मुहीम छेड़ी है इसने नस्लवाद के स्थापित प्रतीकों को भी अब निशाने पर लेना शुरू किया है.

लंदन शहर के मेयर सादिक़ ख़ान ने कहा है कि लंदन शहर से ऐसे और भी साम्राज्यावादी और नस्लभेदी सख़्सियतों के बुतों को हटाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि वह इसे लेकर एक आयोग गठित करेंगे ताकि लंदन शहर के स्मारक यहां की विविधता को दर्शाएं.


उन्होंने स्काई न्यूज़ से बात करते हुए कहा,


''मैं हमारी पुलिस पर हमले का किसी भी तरह की अराजकता का या आपराधिक गतिविधि का समर्थन नहीं करता लेकिन हमें इस बात को स्वीकारना होगा कि सार्वजनिक जगहों में लगी चीजों या ​गतिविधियों से हमारे शहर के 2020 के मूल्य झलकने चाहिए. यह बहुत असहज करने वाला सच है कि हमारे देश और शहर की दौलत का एक बड़ा हिस्सा ग़ुलामों के व्यापार में शामिल रहा है और इसलिए यह हमारे सार्वजनिक जगहों में दिखाई भी देता है. ​जबकि समाज से जुड़े कई लोगों को जिनका बड़ा योगदान है उन्हें जानबूझकर अनदेखा कर दिया गया है.''

ब्रिटेन में ही अलग अलग जगहों पर चल रहे प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारी सेसिल रोड्स की मूर्तियों को भी हटाए जाने की मांग कर रहे हैं. रोड्स दक्षिण अफ़्रीका में विक्टोरिया काल के एक साम्राज्यवादी प्रतिनिधि की छवि काले लोगों के प्रति क्रूर और शोषक की रही है. 1934 में दक्षिण अफ़्रीका की केप टाउन युनिवर्सिटी में लगाई गई रोड्स की एक विशाल मूर्ति को छात्रों के एक उग्र आंदोलन के बाद अप्रैल 2015 में हटा लिया गया था.


इधर स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग में भी 18 वी सदी के नेता हेनरी डन्डैस की मूर्ति को हटाने के मांग उठी है जिसने ब्रिटेन में ग़ुलाम प्रथा को ख़त्म करने का विरोध किया था और माना जाता है कि जिसकी वजह से ब्रिटेन में इस प्रथा के ख़त्म होने में 15 सालों की देरी हुई.


अगर निर्णायक तौर पर दुनिया भर के अलग अलग शहरों से काले लोगों की ग़ुलामी के इन प्र​तीकों को ज्यॉर्ज फ्लाइड की ​हत्या के ख़िलाफ़ उभरे आंदोलनों के बाद हटाया जाता है तो यह इस आंदोलन की एक और ऐतिहासिक सफलता होगी.

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