अफ़ग़ानिस्तान में गनी और अब्दुल्ला साझा करेंगे सत्ता

दोनों विरोधी नेता हुए शक्ति साझाकरण समझौते पर सहमत. गनी बने रहेंगे राष्ट्रपति. मंत्री परिषद में दोनों की 50 प्रति​शत की रहेगी हिस्सेदारी.

- Khidki Desk

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ गनी और उनके प्रतिद्वंद्वी अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने रविवार को महीनों से चली आ रही राजनीतिक अनिश्चितता को समाप्त करते हुए एक शक्ति-साझाकरण समझौते पर हस्ताक्षर किए है.


समझौते के तहत, अब्दुल्ला शांति वार्ता के लिए परिषद का नेतृत्व करेंगे और दोनो ही समान संख्या में कैबिनेट के मंत्री चुनेंगे और सदस्यों को कैबिनेट में शामिल करेंगे. हालांकि राष्ट्रपति का पद गनी ही संभालेंगे, लेकिन अब्दुल्ला के पास आंतरिक, आर्थिक, न्याय और श्रम जैसे अहम मंत्रालय होंगे. ये समझौता देश में चले आ रहे प्रतिरोध के समाप्त होने का संकेत भी दे रहा है. इस समझौते से देश में कुछ महीनों से चल रहे राजनैतिक संकट के खत्म होने के भी कयास लगाये जा रहे हैं. बता दें की पिछले साल सितम्बर माह में अशरफ गनी और उनके प्रतिद्वंदी अब्दुल्ला अब्दुल्ला, दोनों ने ही राष्ट्रपति चुनाव में जीत का दावा किया था. हालांकि अफगानिस्तानी चुनाव आयोग ने अशरफ गनी को कुछ वोटों के अन्तर से विजेता उम्मीदवार घोषित किया था. अब्दुल्ला ने ये कहते हुए उन्हें विजेता मानने से इनकार कर दिया था कि मतगणना में धांधली हुई है. राष्ट्रपति अशरफ गनी और उनके प्रतिद्वंद्वी के बीच यह शक्ति-साझाकरण समझौता राजधानी काबुल के एक प्रसूति वार्ड में हुए आतंकवादी हमले के ठीक कुछ दिनों बाद हुआ है. इसमें 24 लोगों के मारे जाने की ख़बर आई थी. मृतकों में महिलाएं, नवजात बच्चे और नर्सें भी शामिल थीं. अभी तक किसी भी समूह ने अफगानिस्तान और दुनिया को हैरान करने वाले इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है.

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