चिपको के इलाक़े में आपदा, ग्लेशियर की झील टूटी, 2 जल विद्युत परियोजनाएं ध्वस्त

चिपको आंदोलन का केंद्र रहे रेणी गांव के पास बन रही ऋषिगंगा जल विद्युत परियोजना इस बाढ़ की चपेट में आई है और आशंका जताई जा रही है ​इस परियोजना में काम कर रहे तक़रीबन 150 मज़दूरों लापता हैं.

उत्तराखंड के चमोली जिले में, एवलांच के बाद ग्लेशियर की झील के टूटने से धौलीगंगा और अलखनंदा नदी में भयानक बाढ़ के हालात पैदा हो गए हैं. चिपको आंदोलन का केंद्र रहे रेणी गांव के पास बन रही ऋषिगंगा जल विद्युत परियोजना इस बाढ़ की चपेट में आई है और आशंका जताई जा रही है ​इस परियोजना में काम कर रहे तक़रीबन 150 मज़दूरों लापता हो गए हैं.


चमोली ज़िले के ज़िला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने बताया है कि अब तक 2 मज़दूरों की लाशें रिकवर हुई हैं और 12 लोगों को सुरक्षित बचाया जा सका है. जोशी ने आगे बताया, "एसडीआरएफ़, सेना और आईटीबीपी की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं और परियोजनाओं की टनल में फँसे मज़दूरों को निकालने का काम जारी है."


बाढ़ की गति अलखनंदा नदी के निचले इलाक़ों, नंदप्रयाग और कर्णप्रयाग में पहुंचते हुए धीमी हो गई थी. स्थानीय लोगों ने बताया कि वहां पहुंचते हुए 'नदी का महज़ रंग मटमैला हो गया है जबकि वह ख़तरा पैदा करने वाली स्थिति में नहीं बह रही.''


बाढ़ के तुरंत बाद आपदा प्रबंधन और प्रशासन ने नदी के डाउन स्ट्रीम में रह रहे लोगों के लिए अलर्ट जारी कर दिया था कि वे नदी के आस-पास से सुरक्षित स्थानों में चले जाएं.


इस बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने घटना स्थल का दौरा किया है और राहत और बचाव कार्यों का जायज़ा ​लिया.


स्थानीय लोगों के मुताबिक़ एवलॉंच से ग्लेशियर फटने की यह घटना रविवार की सुबह लगभग 10 बजकर 10 मिनट पर हुई थी, जिसके बाद बाढ़ के पानी ने नदी के निचले इलाक़ों में तबाही मचाई. सोशल मीडिया में शेयर कुछ विडियोज़ में दिखाई दे रहा है कि कि कैसे उफ़नती नदी ने रेणी गांव के पास बन रही ऋषिगंगा जल विद्युत परियोजना ध्वस्त कर डाला.


नदी के डाउन ​स्ट्रीम में तपोवन विष्णुगाड़ ​परियोजना भी बुरी तरह छतिग्रस्त हुई है. डैम साइट पर गए अतुल सती ने खिड़की को बताया कि साइट बुरी तरह ध्वस्त हुई है और रैणी गांव को जोड़ने वाला पुल भी टूट गया है.

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