LGBTQ समुदाय के हक़ में एतिहासिक फ़ैसला

कोर्ट ने कहा है कि अमेरिकी संघीय क़ानून के मुताबिक़ लिंग के आधार पर भेदभाव करना ग़ैरक़ानूनी है. इसी क़ानून की व्याख्या करते हुए कोर्ट ने सैक्सुअल ऑरिएंटेशन और लैंगिक पहचान को भी इसमें शामिल किया है.

- Khidki Desk

अमेरिका की शीर्ष अदालत ने LGBTQ समुदाय के हितों को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला सुनाया है. फ़ैसले के मुताबिक़ कोई भी नियोक्ता या मालिक किसी समलैंगिक या ट्रांसजेंडर कर्मचारी को उसके सैक्सुअल रिएंटेशन या जेंडर के आधार पर काम से निकालता है तो यह देश के नागरिक क़ानून के ख़िलाफ़ माना जायेगा.


कोर्ट ने कहा है कि अमेरिकी संघीय क़ानून के मुताबिक़ लिंग के आधार पर भेदभाव करना ग़ैरक़ानूनी है. इसी क़ानून की व्याख्या करते हुए कोर्ट ने सैक्सुअल ऑरिएंटेशन और लैंगिक पहचान को भी इसमें शामिल किया है.


एलजीबीटी कार्यकर्ताओं ने अपनी इस बड़ी जीत पर ख़ुशी ज़ाहिर की है. एक एलजीबीटीक्यू एक्टिविस्ट ने कहा-

"आज अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने LGBTQ समुदाय के हक़ में एतिहासिक फ़ैसला दिया है."


ग़ौर करने वाली बात है ये फ़ैसला अमेरिकी सु​प्रीम कोर्ट की जिस 9 सदस्यीय पीठ ने सुनाया है उसमें रूढ़िवादी माने जाने वाले जजों का बहुमत था. फ़ैसले को ख़ुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की ओर से कोर्ट में मनोनित किए गए जज नील गॉर्सच ने लिखा. इधर ट्रम्प ने भी अदालत के फ़ैसले को स्वीकारने की बात कही है.


हालांकि पहले ट्रम्प सराकार ने नियोक्ताओं का पक्ष रख रहे वक़ीलों के तर्क का समर्थन किया था. इन वक़ीलों का कहना था कि अमेरिका में 1964 में लाया गया नागरिक अधिकार क़ानून किसी भी सैक्सुअल रिएंटेशन और लैंगिक पहचान के संदर्भ में नहीं था.


जज नील गोर्सच ने अदालत में कहा कि जब कोई नियोक्ता इन तर्कों के आधार पर किसी कर्मचारी को निकालता है तो वह उसके लिंग के आधार पर ही ऐसा करता है जो कि अमेरिका के संघीय क़ानून के मुताबिक़ ग़लत है.


इस फैसले के बाद पूरे अमेरिका के साथ ही दुनिया भर में , LGBT समुदाय के लोगों में आने वाले समय में अपने अधिकारों के और भी मज़बूत होने को लेकर उम्मीद जगी है. इस फैसले के बाद लोगों ने अपनी अपनी ख़ुशी सोशल मीडिया पर ज़ाहिर की।


Apple के CEO टिम कुक ने ट्वीट करते हुए लिखा कि - सुप्रीम कोर्ट को इस फैसले के लिए शुक्रिया। LGBTQ समुदाय के नागरिक भी अपने काम करने की जगह पर बराबर के व्यवहार का हक़ रखते है। और आज का फ़ैसला आने वाले वक्त में इनके अधिकारों की रक्षा करेगा।


कैलिफोर्निया के रहने वाले सीन के हेसलिन ने इसे एक भावनात्मक दिन बताया। उन्होंने कहा- 30 साल से अधिक समय से देश भर के ग्राहकों के साथ काम करने वाले एक वित्तीय सलाहकार के रूप में, मैंने ऐसे लोगों की अनगिनत कहानियाँ सुनी हैं, जिन्होंने केवल समलैंगिक होने के कारण अपनी नौकरी खो दी है। यह मुझे बहुत नाराज़ और दुखी करता रहा। लेकिन आज के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सुनकर मुझे आंसू आ गए।''


1964 का नागरिक अधिकार अधिनियम का टायटल VII, नियोक्ताओं को लिंग, जाति, रंग, राष्ट्रीय मूल और धर्म के आधार पर कर्मचारियों के साथ भेदभाव करने से रोकता है. कोर्ट ने इसी क़ानून के आधार पर अब पहली बार ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए कानूनी सुरक्षा के बारे में सीधे बात की है.