कैसे थामा है क्यूबा ने कोरोना प्रकोप

अधिकारियों का कहना है कि ये दवाएं हाइपर-इन्फ्लेमेशन को असरदार तरीक़े से कम करने में कामयाब रही हैं जिसके चलते क्यूबा में मौत के आंकड़ों को काफ़ी हद तक कम किया जा सका.

- Khidki Desk

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कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच अपनी स्वास्थ सुविधाओं का फिर से लोहा मनावाने वाले लैटिन अमेरिकी देश क्यूबा ने कहा है कि उसके डॉक्टर्स ने दो ऐसी दवाओं का ​इस्तेमाल किया है जिससे वह कोरोनावारस से होने वाली मौंतों पर क़ाबू पा सका है.


क्यूबा के स्वास्थ अधिकारियों ने बताया है कि देश की बायोटेक इंडस्ट्री की ओर से उत्पादित इन दोनों दवाओं का इस्तेमाल कोरोनावायरस से गंभीर रूप से पीड़ित मरीज़ों पर किया गया.


इनमें से एक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी itolizumab/इटोलाज़ुमैब है जो कि क्यूबा के अलावा दूसरी जगहों में भी उत्पादित होती है.


क्यूबा के अधिकारियों का कहना है कि इसके अलावा एक और दवा है जिसकी खोज क्यूबा की बायोटेक इंडस्ट्री ने की है और rheumatoid arthritis के लिए इसके फ़ेज़ टू क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं.


अधिकारियों का कहना है कि ये दवाएं हाइपर-इन्फ्लेमेशन को असरदार तरीक़े से कम करने में कामयाब रही हैं जिसके चलते क्यूबा में मौत के आंकड़ों को काफ़ी हद तक कम किया जा सका.


क्यूबा में पिछले 9 दिनों में कोरोना संक्रमण के 200 से अधिक सक्रिय मामलों में से महज 2 मौंतें दर्ज हुई हैं जिसका श्रेय इन दो दवाओं को दिया जा रहा है. क्यूबा में अब तक कोरोना संक्रमण से 81 लोगों की मौत हुई है जबकि वहां कुल संक्रमण के 1,916 मामले दर्ज हैं.


ऐसे में जबकि दुनिया भर के कई देश और ख़ुद विश्व स्वास्थ संगठन भी कोरोना वायरस के टीके के बन पाने को लेकर आशंका जता चुके हैं तो अगर वाकई ये दो दवाएं कोरोनावायरस के इलाज में प्रभावी हो सकी तो यह बड़ी राहत की बात हो सकती है.

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