अमेरिकी समाज में कितना गहरा है नस्लवाद?

एक तरफ़ सिविल सोसायटी के कुछ तबके इस घटना पर माफ़ी मांगकर और न्याय की मांग करते हुए एक नैतिक मिसाल कायम कर रहे हैं तो वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रम्प प्रदर्शनों को काबू करने के लिए सेना भेजने की बात कर रहे हैं.

- अभिनव श्रीवास्तव

अब ये स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका में उबाल ला देनी वाली काले नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की मौत असल में हत्या ही थी. फ्लॉयड की आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ये कहा गया है कि इस मौत का कारण पुलिस द्वारा जबरन फ्लॉयड की गर्दन दबाना और इस चलते आया हृदयाघात है.


कल अमेरिकी राज्य फ्लोरिडा की राजधानी मियामी में गोरे पुलिसकर्मियों ने फ्लॉयड की हत्या के लिए घुटनों के बल झुककर माफ़ी मांगी। ठीक इसी तरह की तस्वीरें और वीडियो जैक्सनविल, लॉस एंजेलिस, पीटसबर्ग, न्यूयॉर्क समेत कई और जगहों से भी आते रहे.


इधर नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन के पूर्व दिग्गज माइकल जॉर्डन ने भी इस घटना पर अपना विरोध दर्ज कराया तो हॉलीवुड समेत कई युवा फुटबॉलरों और क्लब्स ने भी नस्लवाद के ख़िलाफ़ हो रहे इन प्रदर्शनों का अलग-अलग ढंग से समर्थन किया है. इंग्लैंड के 20 वर्ष के विंगर जाडोन सांचो, मोरक्को के 21 साल के राइट बैक अशरफ हकीमी और 22 साल के मार्कस थुरम ने रविवार को मैदान फ्लॉयड के लिए न्याय की मांग की थी.


शाल्के के अमेरिकी मिडफील्डर वेस्टन मैकेनी भी इस घटना पर अपना विरोध जता चुके हैं. प्रतिष्ठित प्रीमियर लीग लिवरपूल के 29 फुटबॉल खिलाड़ियों ने भी सोमवार को मैदान में एक गोल घेरा बनाकर मिनीपोलीस में हुई घटना का सांकेतिक विरोध किया.


अमेरिका में नस्लवाद के ख़िलाफ़ ये चेतना एक दिन में नहीं आई है. इसका लम्बा इतिहास रहा है और बरसों तक यहां मूल अमेरिकी, एशियाई अमेरिकी, अफ्रीकी अमेरिकी और लेटिन अमेरिकी जातीय समूह नस्लीय भेदभाव का शिकार रहे.


यह वह दौर था जब अमेरिका में श्वेत स्टेलर सोसायटी का वर्चस्व था और काले समुदाय उनके गुलाम हुआ करते थे. इसका सबसे भयानक दंश अफ्रीकी-अमेरिकी कहे जाने वाले समूहों ने झेला. साल 1619 से लेकर 1865 तक यह समुदाय ग़ुलाम की हैसियत से रहा। तब युद्धबंदियों के रूप में इनका इस्तेमाल और ख़रीद-फ़रोख़्त आम बात थी। अमेरिका में फरवरी में ब्लैक हिस्ट्री मंथ इसी दौर की याद में मनाया जाता है. तब कई उपनिवेशों में गुलामी प्रथा वैध थी.


साल 1787 में संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान में निजी स्वतंत्रता पर जोर दिया गया पर काले समुदायों को वोट देने का अधिकार तब भी नहीं मिल सका. आगे आने वाले साल नस्लवाद के ख़िलाफ़ निर्णायक लड़ाई के साल थे जिसका नतीजा साल 1808 में बने एक क़ानून में निकला जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय गुलाम व्यापार पर रोक लगा दी गई.


साल 2020 का अमेरिका कई मायनों में अपने इस संघर्ष और इतिहास का आईना नज़र आ रहा है. एक तरफ़ सिविल सोसायटी के कुछ तबके इस घटना पर माफ़ी मांगकर और न्याय की मांग करते हुए एक नैतिक मिसाल कायम कर रहे हैं तो वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रम्प प्रदर्शनों को काबू करने के लिए सेना भेजने की बात कर रहे हैं. कई जगहों पर पुलिस पहले ही लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल कर चुकी है. लेकिन अब ट्रम्प प्रदर्शनों को पूरी तरह कुचलने का संदेश देते हुए नज़र आ रहे हैं. उन्होंने व्हाइट हाउस से जारी एक प्रेस बयान में कहा —


''इसलिए मैं तत्काल प्रैसिडेंसियल एक्शन ले रहा हूं. अमेरिका में हिंसा को रोकने के लिए और सुरक्षा को बहाल करने के लिए. मैं दंगों और लूटपाट को रोकने के लिए, तबाही और आगज़नी को रोकने के लिए, और आप लोगों के क़ानून से संरक्षित अधिकारों की सुरक्षा के लिए, जिनमें आपके दूसरे संशोधन के अधिकार भी शामिल हैं, मैं सभी उपलब्ध संघीय, नागरिक और सैन्य संसाधनों को जुटा रहा हूं.''

उन्होंने आगे जोड़ा —


"आज मैंने ज़ोर डालते हुए सभी गवर्नरों से नैश्नल स्क्योरिटी गार्डस को पर्याप्त मात्रा में तैनात करने के लिए कहा है, ताकि हम सड़कों पर नियंत्रण पा सकें. मेयरों और गवर्नरों को क़ानून व्यवस्था स्थापित करने के लिए सख़्ती करनी होगी जब तक कि हिंसा को ख़त्म नहीं कर दिया जाता . अगर कोई शहर या राज्य उन ज़रूरी क़दमों को उठाने से इनक़ार करेगा, जिनसे कि उसके नागरिकों के जीवन और सम्पत्ति की रक्षा होनी है तो मैं अमेरिका की सेना को वहां तैनात करूंगा और जल्दी से उनकी दिक़्कतों को निपटा दुंगा."

हालांकि आगामी चुनावों में विपक्षी डैमोक्रेटिक पार्टी के संभावित उम्मीदवार जोए बिडेन ने अपने ही नागरिकों के ख़िलाफ़ सेना के इस्तेमाल के राष्ट्रपति के इस क़दम की आलोचना की है.


साल 2020 का अमेरिका कई मायनों में अपने इस संघर्ष और इतिहास का आईना नज़र आ रहा है. ज़ाहिर है कि आने वाले कुछ दिन बेहद तनावपूर्ण हो सकते हैं. लेकिन इस घटना ने जहां एक ओर अमेरिकी समाज में गहरे फ़ैले नस्लवाद की गहरी छाया का आभास कराया है तो इन प्रतिरोधों ने अमेरिकी समाज में मौजूद नस्लवाद के गहरे विरोध के आधुनिक मूल्यों की भी तस्वीर उकेरी है.


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