International Bulletin: 'परेशान करेंगे तो नष्ट कर दिए जाएँगे ईरानी जहाज़' : ट्रम्प

आज है 23 अप्रैल, दिन बृहस्पतिवार, आप पढ़ रहे हैं खिड़की इंटरनेश्नल बुलेटिन. यहां हर रोज़ हम आपके लिए लेकर आते हैं दुनिया भर की अहम ख़बरें.

- Khidki Desk


जर्मनी और ब्रिटेन में कोराना के टीके के मानव परीक्षण को हरी झंडी

इस हफ़्ते जर्मनी और ब्रिटेन ने कोरोनावायरस के टीके के लिए मानव परीक्षण को अनुमति दे दी है. अमेरिका और चीन के बाद ये दो देश होंगे जो कि कोरोनावायरस के टीके का इंसानों में प्रयोग कर यह जांचेेंगे कि क्या यह टीके इस वायरस के ख़िलाफ़ इंसानी प्रतिरोधक क्षमता को कामयाब बना पाएंगे? बृहस्पतिवार को जर्मनी के स्वास्थ मंत्री जेन्स स्पाह्न ने घोषणा की है कि जर्मनी ने भी कोरोना वायरस के पहले क्लीनिकल ट्रायल को अनुमति दी है. उन्होंने बताया कि जर्मनी में टीकों को अधिकृत करने वाली रेगुलेट्री अथोरिटी, Paul Ehrlich Institute (पाउल एहर्लिच इंस्टिट्यूट) ने BioNTech द्वारा बनाए गए कोरोना वायरस के टीके के पहले ​क्लीनिकल ट्रायल को हरी झंडी दिखा दी है. स्पाह्न ने कहा

''हम पाउल एहर्लिच इंस्टिट्यूट की ओर से अप्रूव की गई वैक्सीन का पहला क्लीनिकल ट्रायल करने जा रहे हैं। शुरूआत में 200 लोगों पर यह ट्रायल होगा. जिनमें 18 साल से लेकर 55 साल के स्वस्थ लोगों पर ट्रायल किया जाएगा। असल में यह एक अच्छा संकेत है कि जर्मनी पहले ही वायरसों के अध्ययन में काफी आगे है ऐसे में हम यह जल्दी कर पाए हैं। हालांकि अब भी ध्यान में रहना चाहिए कि टीके उपलब्ध होने में अब भी कुछ महीनों का समय लगना ही है. पहले क्लीनिकल ट्रायल की ओर हम बढ़ तो रहे हैं लेकिन टीकों का मास प्रोडक्शन तभी कराया जा सकता है जब कि उनका पूरी तरह परीक्षण और शोध पूरा हो जाए।''

इससे पहले ब्रिटेन भी यह घोषणा कर चुका है. ब्रिटेन के स्वास्थ मंत्री मैट हेनकॉक ने भी क्लीनिकल ट्रायल की घोषणा की थी.

इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा है कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस एक मानव संकट है जो तेजी से मानवाधिकार संकट में तब्दील होती जा रही है।

गुरुवार को दिए गए एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि कोविड-19 से निपटने में इस्तेमाल हो रही जन सेवाओं की आपूर्ति में भेदभाव हो रहा है और संरचनात्मक विषमताएं इन सेवाओं की आपूर्ति को बाधित कर रही हैं। गुतारेस ने कहा कि कुछ समुदायों पर इस संकट का प्रभाव गैर-आनुपातिक ढंग से ज्यादा पड़ा है और इस बीच नफ़रत फैलाने वाले बयान बढ़े हैं। इसके साथ-साथ कमजोर समूहों पर हमले भी बढ़े हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ देशों में नस्ली राष्ट्रवाद, लोकलुभावनवाद, निरंकुशता और मानवाधिकारों के पीछे हटने के साथ ही सरकारों को ऐसे दमनकारी कदम उठाने का अवसर मिल गया है जिसका मौजूदा संकट से कोई संबंध नहीं है। गुतारेस ने गुरुवार को ये बातें एक रिपोर्ट जारी करते हुए कहीं जिसमें बताया गया है कि कैसे मानवाधिकार मौजूदा संकट से निपटने की राह दिखा सकते हैं।

चीन ने कोरोना महामारी के खिलाफ़ वैश्विक मुहीम में विश्व स्वास्थ्य संगठन को 3 करोड़ अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त आर्थिक मदद देने की घोषणा की है।

चीन के इस क़दम को मौजूदा संकट के दौरान उसके और अमेरिका के बीच चल रही कूटनीतिक खींचतान में बढ़त लेने के प्रयास के तौर पर देखा जा सकता है। ग़ौरतलब है कि क़रीब एक हफ़्ते पहले अमेरिका ने कोरोना महामारी से निपटने में नाकाम रहने की बात कहते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन को दी जाने वाली आर्थिक मदद रोक दी थी।

चीन के विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी ट्विटर पर देते हुए कहा कि यह आर्थिक मदद ख़ास तौर कोरोना महामारी के खिलाफ़ विकासशील देशों को मजबूत करने के लिए है।


विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक बार फिर चेतावनी देते हुए कहा है कि कोरोना वायरस का संक्रमण अभी लंबे समय तक बना रहेगा और कोई भी देश इसे लेकर लापरवाह नहीं हो।

संगठन के प्रमुख डॉ. टेड्रोस गेब्रेसस ने बताया कि अभी कुछ देशों ने इस वायरस से निपटने के लिए कदम उठाने शुरू ही किए हैं। उन्होंने कहा कि जिन देशों को लग रहा है कि उन्होंने इस संकट पर काबू पा लिया, वहां संक्रमण के नए मामले सामने आने लगे हैं जो एक चेतावनी है। ग्रेबेसस ने बताया कि संगठन ने ठीक समय पर 30 जनवरी को कोरोना महामारी को वैश्विक आपदा घोषित किया था जिससे हर देश को इससे निपटने के लिए रणनीति बनाने का वक़्त मिल सके। उन्होंने कहा कि पश्चिमी यूरोप में अब कोरोना संक्रमण की दर कुछ स्थिर हुई है लेकिन अन्य जगहों पर मामले अब भी बढ़ रहे हैं। इसलिए यह वक़्त लापरवाह होने का नहीं है। यह ग़ौर करने वाली बात है कि अमेरिका ने कुछ ही दिनों पहले इस महामारी से लड़ने में विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए संगठन को दी जाने वाली आर्थिक मदद रोक दी थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने एक ट्वीट के जरिए ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरानी जहाज़ अगर समुद्र में अमेरिकी जहाज़ों को परेशान करते हैं तो उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा

ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने ऐसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अमेरिकी नौ सेना को आदेश दे दिया है। वहीं ईरान के रक्षा मंत्रालय ने ट्रम्प के इस बयान को आधारहीन बताते हुए कहा कि वास्तव में फारस की खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौ सेना की अवैध उपस्थिति ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। ट्रम्प के ट्वीट के जवाब में भी ईरानी सेना के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका को इस समय सारा ध्यान अपने सेना को कोरोना संक्रमण से बचाने में लगाना चाहिए। बता दें कि अमेरिक