IMF का अनुमान, कोरोना से कितना नुक़सान?

IMF ने कहा है कि इस महामारी से होने वाला वास्तविक नुकसान उसके दो महीने पहले लगाए गए अनुमान से कहीं ज्यादा गंभीर हो सकता है.

- शदाब हसन ख़ान



अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने बुधवार को जारी अपने ताजा पूर्वानुमान में बताया है कोविड-19 महामारी के कारण विश्व की अर्थव्यवस्था को 12 लाख करोड़ से अधिक का नुकसान होगा। संस्था के अनुमान के मुताबिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में इस साल 4.9 फीसदी की कमी होगी। जो कि संस्था द्वारा अपनी वर्ल्ड इकोनॉमी आउटलुक द्वारा दो माह पहले बताए गए अनुमान से 1.9 फीसदी कम है।


अप्रैल में जारी अपनी पिछली रिपोर्ट में आईएमएफ ने 3 फीसदी कमी का अनुमान जताया था। आईएमएफ ने कहा है कि इस महामारी से होने वाला वास्तविक नुकसान उसके दो महीने पहले लगाए गए अनुमान से कहीं ज्यादा गंभीर हो सकता है। संस्था की मैर्नेंजग डायरेक्टर क्रिस्टीना जॉर्जिवा का कहना है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद आर्थिक वृद्धि में यह सबसे ज्यादा सालाना गिरावट होगी। वैश्विक अर्थव्यवस्था को 2019 की स्थिति में आने के लिए कम से कम दो वर्ष लगेंगे।


आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्री गीता गोपीनाथ ने कहा-


अप्रैल में जारी वर्ल्ड इकोनॉमी आउटलुक के अनुमानों से तुलना करें तो इस रिपोर्ट के अनुसार 2020 में हम और ज्यादा गिरावट का अनुमान लगा रहे हैं। लेकिन 2021 में अर्थव्यवस्थाओं में धीमी गति से सुधार होगा। इस तरह 2020 के लिए वैश्विक वृद्धि दर में 4.9 प्रतिशत गिरावट का अनुमान है, जो अप्रैल वाले हमारे पूर्वानुमान से 1.9 प्रतिशत कम है। इससे जाहिर है कि इस वर्ष की पहली छमाही के लिए लगाए गए हमारे अनुमान से कहीं न कहीं ज्यादा खराब हालात हैं। वहीं दूसरी छमाही में भी चिकित्सीय सुविधाओं के अभाव में लोग बहुत ज्यादा अवधि के लिए सामाजिक दूरी बनाने को बाध्य होंगे।

गीता गोपीनाथ ने आगे कहा कि महामारी से अर्थव्यवस्थाओं को लॉकडाउन का सामना करना पड़ा। हालांकि इससे वायरस को काबू करने और जीवन को बचाने में मदद मिली, लेकिन महामंदी के बाद यह सबसे बड़ी गिरावट की चपेट में भी आई है। उन्होंने कहा कि 75 प्रतिशत से अधिक देश अब अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ खोल रहे हैं, दूसरी तरफ कई उभरते बाजारों में यह महामारी तेजी से फैल रही है। कई देशों में सुधार हो रहा है, लेकिन चिकित्सीय समाधान के अभाव में सुधार अनिश्चित है और विभिन्न क्षेत्रों तथा देशों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ा है। लॉकडाउन के कारण मांग और खपत में कमी आई है। करोड़ों लोगों पर काफी समय के लिए बेरोजगारी का खतरा मंडरा रहा है। वैश्विक श्रम की बात करें तो काम के घंटों में कमी आने से 300 मिलियन नौकरियां चली जाएंगी।


संस्था का कहना है कि इस साल अमेरिका का सकल घरेलू उत्पाद 8 प्रतिशत घट जाएगा। अप्रैल में 5.9 फीसदी कमी का अनुमान जताया था। यह महामारी कम आय वाले परिवारों को बहुत बुरी तरह से नुकसान पहुंचा रही है। इससे गरीबी को कम करने की सरकारों की कोशिशों को तगड़ा झटका लगेगा। यूके की अथवयवस्था 10 फीसदी सिकुड़ने का अनुमान है, हालांकि 2021 में सुधार की उम्मीदें हैं। इटली, फ्रांस और स्पेन को इससे भी ज्यादा नुकसान हो सकता है।


महामारी ने 2020 की पहली छमाही में अधिक नकारात्मक प्रभाव डाला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 में वैश्विक विकास दर 5.4 फीसदी रहेगी। 2020 में पहली बार सभी क्षेत्रों में नकारात्मक विकास दर रहने का अनुमान है। चीन में जहां पहली तिमाही में आई गिरावट से रिकवरी जारी है, वहीं इस साल विकास दर 1 प्रतिशत अनुमानित है। अगर संक्रमण बढ़ने की दर तेज होती है तो खर्च बढेंगे और वित्तीय स्थिति और तंग होगी। इससे स्थिति और खराब हो सकती है। भू-राजनीतिक और व्यापार तनाव वैश्विक संबंधों को ऐसे समय और नुकसान पहुंचा सकता है जब व्यापार में करीब 12 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका है।


पहले इस अप्रत्याशित संकट ने निर्यात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं में रिकवरी की संभावनाओं को प्रभावित किया। साथ ही विकासशील और विकसित अर्थव्यवस्थाओं के बीच आय समन्वय की संभावनाओं को धूमिल किया। अनुमान है कि 2020में विकसित और उभरती तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में बड़ी गिरावट आएगी। विकसित अर्थव्यवस्था में जहां वृद्धि दर में 8 प्रतिशत की गिरावट आएगी। वहीं उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के मामले में वृद्धि दर 3 प्रतिशत घटेगी। और अगर चीन को हटा दिया जाए तो यह गिरावट 5 प्रतिशत होगी। साथ ही 95 प्रतिशत से अधिक देशों में 2020 में प्रति व्यक्ति आय में नकारात्मक वृद्धि होगी।