कोरोना दौर में बढ़ती आपसी नफ़रत

Updated: May 9

यह प्रवृत्ति सिर्फ देशों के बीच नहीं बल्कि देशों के भीतर मौजूद समुदायों में भी देखने को मिली है. अलग अलग समुदाय एक दूसरे पर कोरोनावायरस को फ़ैलाने के आरोप लगा रहे हैं. इसकी बानगी भारत में भी देखने को मिली जब मीडिया के एक हिस्से और ख़ास राजनीतिक हितों के पैरोकारों ने पूरे देश में तबलीग़ी ज़मात पर कोरोना वायरस के संक्रमण का ठीकरा फ़ोड़ दिया.

- रोहित जोशी


कोरोनावायरस के प्रकोप के उभार के बाद दुनिया भर में नफ़रत की एक ख़ास प्र​वृत्ति को उभरते देखा गया है. जिस तरह अमेरिका चीन पर कोरोनावायरस को जानबूझ कर फ़ैलाने के लगातार आरोप लगा रहा है ठीक इसी तरह चीन ने भी अमेरिकी सेना पर यह आरोप लगाए, कि वुहान शहर में अमेरिकी सेना ने यह वायरस छोड़ा. इसी तरह के बयान मध्यपूर्वी देशों से भी आए हैं. अधिकतर देशों ने ईरान पर आरोप लगाए कि ईरान के कारण उनके देशों में कोरोना का प्रसार हुआ.

यह प्रवृत्ति सिर्फ देशों के बीच नहीं बल्कि देशों के भीतर मौजूद समुदायों में भी देखने को मिली है. अलग अलग समुदाय एक दूसरे पर कोरोनावायरस को फ़ैलाने के आरोप लगा रहे हैं. इसकी बानगी भारत में भी देखने को मिली जब मीडिया के एक हिस्से और ख़ास राजनीतिक हितों के पैरोकारों ने पूरे देश में तबलीग़ी ज़मात पर कोरोना वायरस के संक्रमण का ठीकरा फ़ोड़ दिया. इसके बाद देश के अलग अलग हिस्सों में यह नरेटिव स्थापित करने की कोशिश हुई कि मुसलमान समुदाय देश भर में कोरोनावायरस के संक्रमण के लिए जवाब देह है. रेहड़ी लगाने वाले सब्ज़ी बेचने वाले और इसी तरह के कई छोटे मुसलमान व्यापारियों के साथ मारपीट की घटनाओं के कई विडियो सोशल मीडिया में वायरल होते देखे गए. यही हाल उन प्रवासी मज़दूरों का भी हुआ जो कि लॉकडाउन के बाद अमानवीय हालातों में किसी तरह अपने मूल स्थानों की ओर वापस लौट जाने के लिए महानगरों में अलग अलग जगहों पर इकट्ठा हुए या फिर पैदल ही निकल पड़े.


अमेरिका में भी जहां देखा गया है कि संक्रमण का स्तर उन इलाक़ों में ज़्यादा है जहां नस्लीय या धार्मिक अल्पसंख्यक रहते हैं. इन इलाक़ों के प्रति भी इसी तरह की ​नफ़रत को दर्ज किया गया है. दुनिया भर में कोरोनावायरस के दौर में फ़ैल रही इसी तरह की नफ़रत पर अफ़सोस जताते हुए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटरेश ने कहा है ''ऐसी भरपूर कोशिश करने की ज़रूरत है जिससे नफ़रत और ​ज़ेनोफ़ोबिया यानि विदेशियों से घृणा'' करने की प्रवृत्ति को ख़त्म किया जा सके.

उन्होंने कहा कि "महामारी की वजह से नफ़रत, जेनोफ़ोबिया और आतंक फैलाने की एक सुनामी आ गई है. इंटरनेट से लेकर सड़कों तक, हर जगह विदेशियों के खिलाफ़ नफरत बढ़ गई है." इसी क्रम में गुटरेश ने कहा -


''हर एक समाज में नफ़रत के वायरस के ख़िलाफ़ रोगप्रतिरोधक क्षमताओं को मजबूत बनाने के लिए हमें अब क़दम उठाना है. इसलिए मैं आज अपील कर रहा हूं कि दुनिया भर में नफ़रत भरे बयानों को ख़त्म किया जाए. मैं दुनिया भर के नेताओं से यह अपील करता हूं कि वे आगे आएं और अपने समाज के साथ खड़े होकर सामाजिक समरसता को बढ़ाएं. मैं शैक्षणिक संस्थानों से अपील करता हूं कि वे डिज़िटल लिटरेसी पर ध्यान केंद्रित कर, एक ऐसे समय में जब अरबों युवा लोग ऑनलाइन मौजूद हैं और चरमपंथी लोग इन्हें गुमराह करना चाहते हैं अपनी संभावित ऑडियंस मान रहे हैं. मैं मीडिया से अपील करता हूं ख़ासतौर पर सोशल मीडिया कंपनियों से इस बात पर और अधिक ध्यान दें अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानूनों के मुताबिक़, नफ़रत फ़ैलाने वाले नस्लवादी, स्त्री विरोधी और दूसरे इस तरह की ख़तरनाक सामग्री को हटाएं. मैं सिविल सोसाइट से अपील करता हूं कि वे असहाय लोगों, और धार्मिक समूहों तक उनकी मदद के लिए पहुचें और उन्हें आपसी सद्भाव के लिए प्रेरित करें. और मैं हर किसी से, हर जगह, नफ़रत के ​ख़िलाफ़ खड़े होने की अपील करता हूं. मैं अपील करता हूं, कि एक दूसरे से सम्मान के साथ बरताव करें, और हर उस अवसर का इस्तेमाल करें जिससे कि उदारता का प्रसार किया जा सके. पिछले साल मैंने संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों को और बढ़ाने के लिए नफ़रत भरे बयानों के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र की रणनीति और योजना को लॉंच किया था. महामारी के खिलाफ़ इस जंग में हमारा कर्तव्य है लोगों को बचाया जाए, भय को ख़त्म किया जाए और हिंसा से बचा जाए. आइए साथ साथ नफ़रत को हराएं.. और कोविड-19 को भी..''

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