International Bulletin: अफ़्रीका में कोरोनावायरस के मामलों में एक हफ़्ते में 43 प्रतिशत की वृद्धि

आज है 25 अप्रैल, दिन शनिवार, आप भारती जोशी से सुन रहे हैं खिड़की इंटरनेश्नल बुलेटिन. यहां हर रोज़ हम आपके लिए लेकर आते हैं दुनिया भर की अहम ख़बरें.

- Khidki Desk



अफ़्रीका में कोरोनावायरस के मामलों में पिछले एक हफ़्ते में 43 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

चिंता की बात यह है कि अफ़्रीकी देश चिकित्सकीय उपकरणों के लिहाज़ से दुनिया के दूसरे देशों के मुक़ाबल काफ़ी पीछे हैं। हालत यह है कि दस अफ़्रीकी देशों में एक भी वेंटिलेटर नहीं है।


अफ़्रीका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के निदेशक जॉन नेकेंगसॉन्ग ने कहा कि अफ़्रीका के पास अब भी बेहद कम जांच की क्षमता है. ऐसे में संक्रमण का प्रकोप अप्रत्याशित रूप से बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि अफ़्रीकी महाद्वीप का भविष्य पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि यहाँ कोरोना के संकट को कैसे संभाला जाता है. WHO की हालिया रिपोर्ट ने भी अफ़्रीका को लेकर इसी तरह की चिंता जताई थी. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़्रीका में जिस तरह के हालात हैं यह कोरोना का अगला ऐपीसेंटर बन सकता है. यहां कारोना संक्रमण के चलते तीस लाख लोगों के मरने और तकरीबन तीन करोड़ लोगों के भयानक ग़रीबी से घिर जाने की आशंका है।


नेकेंगसॉन्ग ने कहा है कि अफ़्रीकी देशों के पास अब भी समय है कि वह इस तबाही के प्रति सचेत हो सकते हैं लेकिन कोरोना की जांच और उसकी ट्रेसिंग करना बेहद चुनौती पूर्ण है. इसके लिए विश्व संगठनों को उसकी मदद करनी होगी.

अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस एरिस की विला डेवोटो जेल में दर्जनों कैदियों ने जबरदस्त हंगामा शुरू कर दिया.

यह हंगामा जेल के भीतर एक वॉर्डन के कोरोना पॉज़िटिव होने की पुष्टि किए जाने के बाद शुरू हुआ. हंगामा कर रहे क़ैदी जेल में तत्काल स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराए जाने की मांग कर रहे थे. समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक़ जेल परिसर से धमाकों की आवाज़ें भी सुनाई दी थी. क़ैदियों का एक समूह छत पर चढ़ गया जहां उसेने गद्दे जलाए और सुरक्षा गार्डों पर चीज़ें फेंकने लगा. ये क़ैदी नारेबाज़ी कर रहे थे. उन्होंने छत पर कुछ बैनर्स भी लगाए हुए थे जिनमें से एक बैनर पर लिखा था कि ''हम जेल में मरने से इनकार करते हैं.'' पुलिस ने घटना के बाद जेल को पूरी तरह घेर लिया है जहां लगभग 2,200 क़ैदी हैं. अब तक अर्जेंटीना की सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर इस घटना पर कोई बयान नहीं आया है.

जापान का जहां कारोनावायरस प्रकोप

इकनॉमिक रिस्पॉंस के एक वरिष्ठ मंत्री नि​शिमुरा ने ख़ुद को सार्वजनिक संपर्क से पूरी तरह काट लिया है. उनके कार्यालय से आए एक बयान में कहा गया है कि वह एक अपने स्टाफ़ के एक ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आए थे जिसकी अब कोरोना पॉज़िटिव के तौर पर ​पुष्टि हुई है. बयान में कहा गया है कि निशिमुरा अपने इस स्टाफ़ मेंबर के साथ एक युनिवर्सिटी हॉस्पिटल गए थे बाद में वह कोरोना पॉज़िटिव पाया गया। हालांकि बयान में यह भी कहा गया है कि

"ना ही मंत्री में और न ही किसी कर्मचारी में कोरोना के कोई लक्षण दिखाई दिए हैं. ना ही उनकी कोरोना की रिपोर्ट पॉज़िटिव आई है फिर भी एहतियात के तौर पर, हमारे मंत्री और कर्मचारी तब तक घर पर रहेंगे, जब तक कि स्वास्थ्य अधिकारियों से उनकी स्थिति के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त नहीं हो जाती है।"

निशिमुरा को जापान में कोरोनावायरस के ख़िलाफ़ अभियान के एक प्रमुख चेहरे के बतौर माना जा रहा है।

बंगाल की खाड़ी में कोरोनावायरस का प्रकोप

कम से कम 500 रोहिंग्या गहरे समुद्र के भीतर कई हफ़्तों से फंसे हुए हैं. आसपास का कोई देश उन्हें स्वीकारने को तैयार नहीं है और बांग्लादेश ने भी इन रोहिंग्याओं के बांग्लादेश में प्रवेश के लिए मना कर दिया है।

मानवाधिकार संगठन इसकी आलोचना कर रहे हैं. हालांकि बांग्लादेश के विदेश मंत्री AK Abdul Momen ने कहा है कि इनकी ज़िम्मेदारी बांग्लादेश की नहीं है. उन्होंने कहा है कि ये फंसे हुए लोग गहरे समुद्र में हैं ​जो कि बांग्लादेश की सीमा से काफ़ी दूर है. ऐसे में बांग्लादेश से उन्हें स्वीकारने की अपेक्षा क्यों की जा रही है? इससे पहले मले​शिया ने इन रोहिंग्याओं को स्वीकारने से मना कर दिया था। वहां कोरोनावायरस के प्रकोप के चलते बाहर से आ रही किसी भी बोट को प्रवेश की अनुमति नहीं है. संयुक्त राष्ट्र रिफ्यूज़ी एजेंसी UNHCR ने चिंता जताई है कि हफ़्तों से समुद्र में फंसे हुए इन रोहिंग्या लोगों के पास खाने को पर्याप्त खाना और पीने का पानी नहीं होगा.

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के उस अजीब बयान के बाद कई राज्यों की आशंकाएं बढ़ गई हैं