संदिग्ध परमाणु ठिकानों के निरीक्षण के लिए ईरान तैयार

IAEA कई महीनों से ईरान से अपील कर रही थी कि वे तेहरान और इस्फ़हान के अपने न्युक्लियर संयंत्रों का निरिक्षण करने की उसे इजाज़त दे. IAEA को शक है कि ईरान ने इन संयंत्रों में अघोषित तौर पर परमाणु सामग्री को स्टोर किया हुआ है.

- Khidki Desk

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एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, महीनों लंबे चले गतिरोध के बाद अब ईरान, संयुक्त राष्ट्र के न्यूक्लियर वॉचडॉग के निरीक्षकों को अपने संदिग्ध परमाणु संयंत्रों के निरीक्षण की अनुमति देने के लिए सहमत हो गया है.


International Atomic Energy Agency यानि (IAEA) को शक रहा है कि ईरान इन संयंत्रों का इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा के बजाय परमाणु हथियार बनाने के लिए कर रहा है. उच्च स्तरीय बातचीत के लिए IAEA प्रमुख रफ़ाल ग्रॉसी के ईरान दौरे के दौरान बुधवार को दोनों पक्ष इस समझौते पर पहुंचे हैं.


एक साझे बयान में ग्रॉसी और ईरान की परमाणु एजेंसी के प्रमुख अली अक़बर सालेही ने कहा है -

''ईरान IAEA की ओर से बताई गई दो लोकेशंस पर उसके निरीक्षकों को, स्वेच्छा से अनुमति दे रहा है. IAEA को दी गई इस अनुमति और वहां वेरिफ़िकेशन गतिविधियों के लिए तारीख़ तय कर दी गई हैं.''

इसके बदले में ऐजेंसी ने कहा है कि इस मामले को लेकर आगे अब वह कोई सवाल नहीं पूछेगी. ऐजेंसी ने एक बयान में कहा है -

''IAEA की ओर से अपनी वैरिफ़िकेशन गतिविधियों को पूरा करने के लिए, स्वतंत्रता, निष्पक्षता और प्रोफ़ेश्नलिज़्म की जो भी अनिवार्यताएं हैं उन्हें दोनो पक्षों ने स्वीकारा है.''

IAEA कई महीनों से ईरान से अपील कर रही थी कि वे तेहरान और इस्फ़हान के अपने न्युक्लियर संयंत्रों का निरिक्षण करने की उसे इजाज़त दे. IAEA को शक है कि ईरान ने इन संयंत्रों में अघोषित तौर पर परमाणु सामग्री को स्टोर किया हुआ है.


जून में IAEA ने ईरान पर इसके लिए और अधिक दबाव बनाया था. IAEA के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स ने इसे लेकर एक रिजॉल्युशन पास किया था. लेकिन बुधवार तक, ईरान इससे इनकार करता रहा और उसने आरोप लगाए कि IAEA उसके संयंत्रों के निरीक्षण की अपील ​इसराएल के आरोपों के आधार पर कर रहा है​ जिसका कोई भी क़ानूनी आधार नहीं है.


इधर ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक़ बुधवार को राष्ट्रपति हसन रुहानी का भी इसे लेकर एक बयान आया है जिसमें उन्होंने कहा है, ''ईरान हमेशा की तरह, IAEA को सहयोग करने को तैयार है.''


इधर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आरोप लगाते हुए अमेरिका संयुक्त राष्ट्र पर लगातार दबाव बना रहा है कि ईरान पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों की अवधि को बढ़ाया जाए. हालांकि इसे लेकर संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी प्रस्ताव ख़ारिज़ किया जा चुका है. अब IAEA को ईरान की ओर से अपने संदिग्ध परमाणु संयंत्रों के निरीक्षण के लिए दी गई इस अनुमति से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने ईरान की स्थिति और मज़बूत होती दिख रही है.

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