'चुनावी तानाशाही में बदला सबसे बड़ा लोकतंत्र'

Varieties of Democracy यानि V-Dem ने अपने एक हालिया Analytical Research Project के हवाले से कहा है कि 'दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र' भारत, अब एक “electoral autocracy” या​नि ''चुनाव आधारित तानाशाही' में बदल गया है.

- Khidki Desk


दुनिया भर में अलग अलग तरह की लोकतांत्रिक शासन प्रणालियों का अध्ययन करने वाले स्वीडन बेस्ड एक संस्थान Varieties of Democracy यानि V-Dem ने अपने एक हालिया analytical research project के हवाले से कहा है कि 'दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र' अब एक “electoral autocracy” या​नि ''चुनाव आधारित तानाशाही' में बदल गया है.


इस संस्थान ने बुधवार को स्वीडन के Deputy Foreign Minister Robert Rydberg की मौजूदगी में अपनी इस रिपोर्ट को रिलीज़ किया जिसमें कई क़िस्म के पैरा​मी​टर्स के आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर दुनिया भर के देशों में लोकतंत्र के हालात का अध्ययन किया गया है.


V-Dem की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लोकतंत्र से तानाशाही की ओर बढ़ने की प्रक्रिया, ''मोटे तौर पर पिछले दस सालों में कई देशों में आए एक ख़ास तरह के पैटर्न की 'तीसरी लहर' के ही क्रम में ही है, जहां धीरे धीरे पहले, मीडिया, अकादमिक क्षेत्र और सिविल सोसाइटी की आज़ादी को छीना जाता है और फिर यह सिलसिला बढ़ता चला जाता है.''


पिछले साल संस्थान ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारत अपने लोकतंत्र का दर्जा खोने के कगार पर है. लेकिन इस बार संस्थान के अनुसार उसने और बेहतर आंकड़ों के अध्ययन के आधार पर स्पष्ट तौर पर यह पाया है कि भारत 2019 के बाद से एक “electoral autocracy'' यानि चुनाव आधारित तानाशाही में तब्दील हो गया है.


रिपोर्ट में कहा गया है, ''भारत में मोदी सरकार ने आलोचकों को चुप कराने के लिए राजद्रोह, मानहानि और आतंकवाद विरोधी क़ानूनों का इस्तेमाल किया है. उदाहरण के तौर पर, बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से 7 हज़ार से अधिक लोगों पर राजद्रोह के आरोप लगाए गए हैं और इनमें से अधिकतर लोग सत्तारूढ़ पार्टी के आलोचक हैं.''

रिपोर्ट में कहा गया है कि, ''भारत इस लिहाज़ से, अब पाकिस्तान की तरह अधिनायकवादी हो गया है और यहां हालात उसके दो अन्य पड़ोसी देशों, बांग्लादेश और नेपाल से भी बुरे हो गए हैं.''


V Dem ने कहा है कि भारत उन देशों में से एक है जो कि 'तानाशाही की तीसरी लहर', से जूझ रहे हैं और मौजूदा समय में दुनिया की आबादी का तक़रीबन 68 प्रतिशत हिस्सा अधिनायकवादी सत्ताओं के मातहत जीवन जी रही है. इसके चलते इस साल की रिपोर्ट को संस्थान ने ''‘Autocratization Turns Viral’ यानि ''वायरल हो रहा अधिनायकवाद'' नाम दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है, ''पिछले दस सालों में लोकतां​त्रीकरण की ओर बढ़ रहे देशों की तादात आधा घट कर महज 16 तक आ गई और, कुल वैश्विक जनसंख्या की 4 प्रतिशत आबादी ही ऐसे देशों में रहती है.'' इस रिपोर्ट में भारत के साथ ही जी 20 देशों में शुमार ब्राज़ील और तुर्की जैसे देशों को भी 10 सबसे बड़े ऐसे देशों में शामिल किया गया है जहां लोकतंत्र का तेज़ी से ह्रास हुआ है.


हालॉंकि भारत सरकार, इस तरह की रिपोर्टों और वैश्विक स्तर पर अपनी आलोचना को अंतर्राष्ट्रीय साजिश का हिस्सा मानती आई है. बीते दिनों में भारत में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में मशहूर गायिका रिहाना और पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग की भारत सरकार की आलोचनाओं को सरकार ने भारत की छवि ख़राब करने की साजिश का हिस्सा बताया था. पिछले दिनों ​ब्रिटिश संसद में भारत के किसान आंदोलन और भारत सरकार के रवैये पर हुई चर्चा के बाद भारत ने उसके आंतरिक मामलों पर विदेशी हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए नारजगी जताई थी. साथ ही इस सिलसिले में ब्रिटिश उच्चायुक्त को तलब भी किया था.



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