कश्मीरियों के अविश्वास पर आख़िरी मुहर?

कश्मीर की अवाम को सूचना अप्रवाह के कर्फ्यू में धकेल, वहां के स्थानीय नेताओं को नज़रबंद कर, उनके भूगोल और इतिहास पर, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की हुक़ूमत द्वारा इतना बड़ा ऐतिहासिक फ़ैसला ले लिया जाना बताता है कि कश्मीर भारत के दूसरे राज्यों की तरह आम नहीं है. कश्मीर भारतीय लोकतंत्र के कवरेज एरिया से बाहर की एक दूसरी चीज है.

-रोहित जोशी



अंतरराष्ट्रीय राजनीति के सबसे जटिलतम भूगोलों में से एक कश्मीर का संकट फिर चर्चा के केन्द्र में आ गया है. अबकी बार वजह बना भारत सरकार का वह क़दम जिसमें जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने वालेअनुच्छेद 370 में राष्ट्रपति के आदेश के ज़रिए फेर बदल कर, जम्मू कश्मीर से, भारतीय गणराज्य के एक राज्य का दर्जा छीन लिया गया और उसके भूगोल को जम्मू कश्मीर और लद्दाख़, दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभक्त करदिया गया. हालांकि जो लोग कश्मीर को लेकर संघ के पुराने एजेंडे से वाक़िफ़ हैं, उन्हें भारतीय राज्य पर पूर्ण बहुमत के साथ क़ाबिज़ संघ के राजनीतिक फ्रंट बीजेपी के इस क़दम पर बहुत आश्चर्य नहीं होना चाहिए.


इसे लागू करने से पहले ही भारत सरकार ने एतिहातन भारी संख्या में फ़ौज और सुरक्षा बलों की तैनाती पूरे जम्मू कश्मीर राज्य में करते हुए वहां धारा 144 लागू कर दी थी. इंटरनेट, मोबाइल फ़ोन और यहां तक कि पहलीबार लैंडलाइन फ़ोन्स की सेवाएं भी रद्द कर दी गई, जिसके चलते कश्मीरी अवाम की इस मसले पर कोई सटीक प्रतिक्रिया जानने कोई ज़रिया नहीं रहा. हालांकि भारतीय सरकार समर्थक मीडिया घरानों ने ख़बरें चलाई किकश्मीर में इस क़दम का स्वागत किया गया है. लेकिन बीबीसी, न्यूयॉर्क टाइम्स् और अन्य अंतराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने दिखाया कि बावजूद धारा 144 लागू होने के, कुछ स्थानों में इस फ़ैसले के विरोध में प्रदर्शन हुए। यहांतक कि कारगिल जैसे क्षेत्र जो कि भारत सरकार और सेना के समर्थक हैं, वहां भी लोगों ने सरकार के इस क़दम को अलोकतांत्रिक और तानाशाही पूर्ण बताया. हालांकि लेह जो कि बौद्ध बहुल इलाक़ा है, वहां से इस फ़ैसलेके स्वागत और जश्न की ख़बरें भी आई हैं.


कई मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय लोगों की डायरीज़ के जो अंश मीडिया के ज़रिए कश्मीर की कहानी कह रहे हैं, बताते हैं कि कश्मीर को सूचना शून्य कर दिया गया है और जन-जीवन अनिश्चित समय के लिए अस्थिरता की तरफ धकेला जा चुका है. फ़ौज की मौजूदगी के बीच अब तक भी कश्मीर की इस पूरे घटनाक्रम पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है, या यूं कहा जाना चाहिए कि नहीं आने दी गई है. विदेशों में रह रहे कश्मीरियों केसमूहों के विरोध प्रदर्शन के भी कई वीडियोज़ सोशल मीडिया में देखे जा सकते हैं. 


कश्मीर की अवाम को सूचना अप्रवाह के कर्फ्यू में धकेल, वहां के स्थानीय नेताओं को नज़रबंद कर, उनके भूगोल और इतिहास पर, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की हुक़ूमत द्वारा इतना बड़ा ऐतिहासिक फ़ैसला ले लिया जाना बताता है कि कश्मीर भारत के दूसरे राज्यों की तरह आम नहीं है. कश्मीर भारतीय लोकतंत्र के कवरेज एरिया से बाहर की एक दूसरी चीज है.


यह सभी को मालूम है कि कश्मीर की ख़ूबसूरत फ़िज़ाओं में 'आज़ादी' की मांग गूंजती रही हैं, एक बड़ी आबादी भारत में रहने को तैयार नहीं. वे अपने एक आज़ाद मुल्क़ की मांग कर रही है. यह भी सच है कि इन्हीं 'आज़ादी' के नारों के बीच 'ज़िहाद' के नारे भी गूंजते सुनाई दिए हैं जिनका बीते समय में एक बड़ा जनाधार बना है. एक छोटा धड़ा पाकिस्तान में मिल जाने का ख़्याल भी रखता है और उतना ही छोटा एक धड़ा हिंदुस्तान के पक्ष में भीबचा है. लेकिन लाखों की तादात में अपनी सेनाएं तैनात किए हुए कश्मीर में मौजूद भारतीय राज्य के अपने तर्क हैं.


'अति राष्ट्रवादी' उन्माद के 'कश्मीर मांगोगे चीर देंगे' जैसे ग़ैर-विवेकी नारों के इतर भी कश्मीर की आज़ादी के पक्ष और विपक्ष में प्रगतिशील हलके में भी पर्याप्त बहस है.


हमने देखा है कि हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी जैसे भारतीय सुरक्षा बलों के हाथों मारे गए कई अलगाववादियों के जनाजे जब कश्मीर में उठे तो लाखों की तादाद में आम कश्मीरी लोग उनकी शवयात्राओं मेंशामिल हुए. यह प्रतीक है कि कैसे कश्मीर में अलगाववादी विचार का बड़ा जनाधार है जो कि जोख़िम उठाकर भी इस विचार को समर्थन देने जा पहुंचता है. ठीक इसी समय इन अलगाववादियों के जनाजों की तस्वीरें जबमीडिया और सोशल मीडिया के रास्ते हिंदुस्तानी आम जन मानस तक पहुंचीं हैं तो वह कश्मीरियों के प्रति संशय की उसकी पूर्वस्थापित समझ को और मजबूत करती हैं. एक 'आतंकी' मारा गया था जिसके जनाजे में कश्मीरीशामिल थे. सोशल मीडिया पर ये तस्वीरें इसी क़िस्म के संदेशों के साथ ख़ूब प्रचारित होती हैं और मीडिया के 'अति राष्ट्रवाद' का शिकार एक धड़ा जो कि भारतीय मीडिया को डोमिनेट करता है, इसे 'राष्ट्रवादी उन्माद'बनाकर परोसता है जिसके भारत भर में बहुतेरे ग्राहक हैं.