महिलाओं के ख़तने और इस्लाम छोड़ने पर सज़ा जैसे क़ानून, सूडान में ख़त्म

सूडान में पिछले साल उमर अल-बशीर के शासन के तख़्तापलट के बाद सत्ता में आई अंतरिम सरकार ने अब तक चले आ रहे ऐसे सभी क़ानूनों को ख़त्म कर दिया है जो मानवाधिकारों का उल्लंघन करते थे. इसमें महिलाओं के ख़तने, इस्लाम छोड़ने पर सज़ा, जैसे क़ानून शामिल हैं. अब सूडान में महिलाएं बिना किसी पुरूष रिश्तेदार के साथ भी यात्रा कर सकेंगी.

- Khidki Desk

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सूडान में पिछले साल उमर अल-बशीर के शासन के तख़्तापलट के बाद सत्ता में आई अंतरिम सरकार ने अब तक चले आ रहे ऐसे सभी क़ानूनों को ख़त्म कर दिया है जो मानवाधिकारों का उल्लंघन करते थे.


कुछ महीने पहले ही वहां महिलाओं के खतने को अपराध घोषित किया गया था और अब इसने क़ानूनी रूप हासिल कर लिया है. इसके अलावा गैर-मुस्लिमों को शराब पीने, इस्लाम त्यागने और महिलाओं को बिना पुरुष रिश्तेदारों के सफर करने का अधिकार भी दे दिया गया है. सूडान के न्याय मंत्री नसरुद्दीन अब्दुलबरी ने इन सभी क़ानूनों की घोषणा करते हुए कहा कि मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले क़ानूनों को ख़त्म किया जा रहा है.


सूडान में आए इन नए क़ानूनों को एक नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले सूडान में दशकों से चले आ रहे इस्लामिक कानून ही सब कुछ तय करते थे. सूडान में महिलाओं का ख़तना करने की परंपरा काफ़ी विवादास्पद रही लेकिन अब मेडिकल संस्थान या घरों में खतना किए जाने पर तीन साल की सजा और जुर्माना हो सकता है. ठीक इसी तरह सूडान में इस्लाम छोड़ने पर मौत की सजा हो सकती थी लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा.

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