कोर्टरूम में घुसकर ईशनिंदा के आरोपी की हत्या

पुलिस के ​मुताबिक़ जिस वक़्त ताहिर अहमद नसीम के मुक़दमे की सुनवाई चल रही थी, ख़ालिद ख़ान नाम का एक व्यक्ति कोर्ट में दाख़िल हुआ और उसने नसीम पर 6 गोलियां दाग दी.

- Khidki Desk


पाकिस्तान के पेशावर शहर में ईशनिंदा के आरोपी ताहिर अहमद नसीम नाम के एक व्यक्ति की अदालत में गोली मार कर हत्या कर दी गई.


पुलिस के ​मुताबिक़ जिस वक़्त ताहिर अहमद नसीम के मुक़दमे की सुनवाई चल रही थी, ख़ालिद ख़ान नाम का एक व्यक्ति कोर्ट में दाख़िल हुआ और उसने नसीम पर 6 गोलियां दाग दी. हालांकि हत्या के बाद हमलावर ख़ालिद ख़ान को गिरफ़्तार कर लिया गया.


पुलिस ने बताया है कि ख़ालिद ख़ान ने इसकी ज़िम्मेदारी क़ुबूल की है और कहा है कि उसने ताहिर अहमद नसीम को इसलिए गोली मारी क्योंकि उसने ख़ुद को पैग़म्बर बताकर पैग़म्बर मुहम्मद का अपमान किया था. यह पाकिस्तान में ईशनिंदा से जुड़ा ताज़ा हिंसा का मामला है.


ताहिर अहमद नसीम के ख़िलाफ़ इसी आरोप में पाकिस्तानी पीनल कोड की दफ़ा 295-A, 295-B और 295-C के तहत मुक़दमा चल रहा था. नसीम 2018 से पुलिस हिरासत में थे. पाक़िस्तान में ईशनिंदा से जुड़ा क़ानून बेहद सख़्त है और इसकी आरोप साबित हो जाने पर मौत की सज़ा का प्रावधान है.


हालांकि हाल के सालों में ईशनिंदा के आरोप में किसी को भी मौत की सज़ा नहीं दी गई है लेकिन बजाय इसके पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोपी व्यक्तियों की क़ानून की परवाह किए बग़ैर हत्याएं होना या ऐसे लोगों का भीड़ की हिंसा का शिकार होना क़ाफ़ी आम है. समाचार वेबसाइट अलजज़ीरा की एक गणना के मुताबिक 1990 के बाद से अब तक ईशनिंदा के आरोपी 77 लोगों की हत्या कर दी गई.


2018 में, एक ईसाई महिला आसिया बीबी पर ईशनिंदा के आरोप में सुनवाई के दौरान पाकिस्तान के सुप्रीमकोर्ट ने एक एतिहासिक फ़ैसला सुनाया था और उन्हें निचली अदालत की ओर से दी गई मौत की सज़ा से बरी कर दिया था. इससे देश की दक्षिणपंथी धार्मिक पार्टियां नाराज़ हो गई थीं और देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए. इन विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व ईमाम ख़ादिम हुसैन रिज़वी की तहरीक-ए-लाबाइक़ पाकिस्तान पार्टी ने​ किया था. यह पार्टी ईशनिंदा करने वाले लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा की खुले तौर पर पैरोकार है.