शहादत की विरासत पर भाजपा-कॉंग्रेस में रस्साकशी



देघाट (उत्तराखंड):  'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान, 19 अगस्त 1942 को अल्मोड़ा के देघाट क़स्बे में हुए गोली कांड में शहीद हुए लोगों की स्मृति में, सोमवार को, भाजपा और कॉंग्रेस ने दो अलग अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया। हालांकि दोनों ही कार्यक्रमों में किसी भी पार्टी के झंडे नहीं फ़हराए गए और दोनों ही आयोजकों का कहना था कि यह पार्टी हितों से परे शहीदों की शहादत का जश्न मनाने के लिए आयोजन किए गए हैं, लेकिन राजनीतिक बयानबाज़ी दोनों तरफ़ से जारी रही.

इसबीच, लगातार हो रही भारी बरसात और मौसम विभाग की ओर से जारी चेतावनी के बावजूद पूरे क्षेत्र से कई महिला मंगल दलों और स्थानीय लोगों ने दोनों ही कार्यक्रमों में शिरक़त की. हालांकि दोनों ही कार्यक्रमों के आयोजकों का कहना था कि भारी बरसात के चलते इस बार आयोजन को सीमित किया गया था.

भाजपा समर्थक, कार्यकर्ता और प्रशासन, 'शहीद दिवस आयोजन समिति' के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में सक्रिय नज़र आए जो कि शहीद स्मारक के पास ही मौजूद एक मंदिर प्रांगण में किया गया वहीं कॉंग्रेस ने देघाट बाज़ार में आयोजन किया.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, क्षेत्रीय सांसद एवं पूर्व केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा ने स्वाधीनता संग्राम में देघाट और उत्तराखंड की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया. इस मौके पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी तारीफ़ की. उन्होंने कहा, ''देघाट के शहीदों के साथ ही, पूरे देश के स्वाधीनता संग्राम सेनानियों और शहीदों को मौजूदा प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर का तोहफ़ा दिया है. अनुच्छेद 370 में बदलाव करके कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा ख़त्म कर दिया गया है.''

उधर स्थानीय विधायक सुरेंद्र सिंह जीना ने कहा, ''मैं सन् 2000 के बाद से लगातार इस कार्यक्रम में शिरकत करने देघाट आता हूं. उन शहीदों को याद करना बेहद ज़रूरी है जिन्होंने हमें आज़ादी दिलाने के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी. देघाट के ये शहीद हमारी विरासत हैं और हमें पार्टी हित से उपर उठ कर इनका सम्मान करना चाहिए.'' जीना ने कॉंग्रेस पर शहीदों की शहादत पर राजनीति करने के आरोप लगाए.

हालांकि ठीक इसी तरह के आरोप कॉंग्रेस ने भाजपा पर भी लगाए. कॉंग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व ब्लॉक प्रमुख गंगा पंचोली ने कहा, ''जब से उत्तराखंड राज्य बना है यहां शहीद दिवस पर दो कार्यक्रम आयोजित होते हैं. मेरे कार्यकाल में मैंने कोशिश की थी कि साझे तौर पर एक ही कार्यक्रम आयोजि हो लेकिन बीजेपी के सदस्यों ने कॉंग्रेस की महिला कार्यकर्ताओं से बदसलूकी की जिसके बाद साथ में कार्यक्रम आयोजित करना संभवन नहीं रहा.'' पंचोली ने आगे कहा, ''हालांकि इस साल 'शहीद दिवस आयोजन समिति' ने अपने आयोजन को सर्वदलीय आयोजन बताया था और उनके अनुरोध पर हमारे वरिष्ठ नेता उनके कार्यक्रम में प्रतिभाग करने गए भी थे लेकिन उन्होंने उन्हें पर्याप्त सम्मान नहीं दिया. स्टेज पर केवल भाजपा नेताओं का ही क़ब्ज़ा था ऐसे में दूसरे दल कैसे एक साथ इस आयोजन में शिरकत कर सकते हैं?''

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