म्यामांर में सैन्य दमन जारी, सीमा पार आए लोगों को वापस भेजेगा भारत

गृह मंत्रालय ने बाहरी लोगों की पहचान करने और उन्हें बिना देरी किए वापस म्यांमार भेजने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए निर्देश दिए हैं.

- Khidki Desk

म्यांमार में सेना का दमन रुकने का नाम नहीं ले रहा. सोमवार को भी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में तीन लोगों के मारे जाने की ख़बर है. पूरे म्यांमार में रविवार को बड़ी संख्या में शवों का अंतिम संस्कार किया गया. शनिवार को लोकतंत्र समर्थक 114 आंदोलनकारियों की, सैन्य प्रशासन की ओर से की गई दमनपूर्ण कार्रवाइयों के दौरान मौत हो गई थी.


रविवार को, रंगून, मीकिटीला, मोनीवा, मंडाले और देश के दूसरे शहरों में जब लोग मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए जुटे, और उन्होंने जुलूस के तौर पर शवयात्राएं निकाली तो सैन्य प्रशासन ने उन पर भी गोलियां बरसाई.


पहली फरवरी को हुए सैन्य तख़्तापलट के बाद से विरोध प्रदर्शनों के दमन के लिए हुई हिंसा में अब तक 423 लोग मारे गए हैं. अकेले शनिवार को ही 114 लोगों की मौत हो गई. मृतकों में 10 से 16 साल के छह बच्चे भी शामिल थे. संयुक्त राष्ट्र ने एक बार फिर सेना के दमन की निंदा की है.


हज़ारों लोग शरण के लिए भारत और थाईलैंड की ओर भाग रहे हैं. मानवीय सहायता के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था ‘फ्री बर्मा रेंजर्स’ के मुताबिक म्यांमार के विमानों ने रविवार को रात भर हवाई हमले किए थे.एजेंसी ने कहा कि म्यांमार के उत्तरी करेन राज्य में लगभग दस हजार लोग विस्थापित हो गए हैं.

इधर, भारत के मणिपुर राज्य की सरकार ने अपने सीमावर्ती ज़िलों को निर्देश दिया है कि म्यांमार से आने वाले शरणार्थियों के लिए रिफ़्यूजी कैंप न खोले जाएं. इससे पहले भारत के केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मिज़ोरम, नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश को म्यांमार से आने वाले अवैध शरणार्थियों को आने से रोकने के लिए इंतज़ाम करने को कहा था. गृह मंत्रालय ने बाहरी लोगों की पहचान करने और उन्हें बिना देरी किए वापस म्यांमार भेजने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए निर्देश दिए हैं.


इस चिट्ठी में गृह मंत्रालय ने ये साफ़ किया था कि राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को किसी विदेशी व्यक्ति को शरणार्थी का दर्जा देने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि भारत ने यूनाइटेड नेशंस रिफ़्यूजी कन्वेंशन पर दस्तख़त नहीं किए हैं.