अब ओज़ोन परत में ये कैसा छेद?

यूरोपियन स्पेस एजेंसी के वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस सप्ताह यह छेद नॉर्दर्न हेमिस्फियर में अब तक का रिकॉर्ड सबसे बड़ा छेद होगा। जर्नल नेचर के मुताबिक, इस छेद का आकार इतना बड़ा है कि इसमें तीन ग्रीनलैंड समा जाएं।

- शुभम गुप्त पुरवार



वैज्ञानिकों की टीम ने कॉपर्निकस सेंटिनल-5P सैटेलाइट के डेटा के ज़रिए आर्कटिक क्षेत्र के ऊपर ओज़ोन परत की सांद्रता या कंसन्ट्रेशन में भारी कमी का पता लगाया है। ब्रिटिश अख़बार द गार्डियन के मुताबिक़, आर्कटिक क्षेत्र के ऊपर एक असामान्य छेद हो गया है और वैज्ञानिकों का इस मसले पर कहना है कि नॉर्थ पोल के वातावरण में इस बार असामान्य तरीके से तापमान कम हुआ है।


इस छेद को अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता है और पिछले कुछ दिनों में ओज़ोन परत की सांद्रता में रिकॉर्ड कमी आई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल यह छेद मानव जाति के लिए ख़तरा नहीं है लेकिन अगर यही परिस्थितियां साउथ पोल की तरफ बढ़ी तो इससे ख़तरा है। अगर यह छेद सदर्न ग्रीनलैंड जैसे अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों की तरफ बढ़ा तो वहां लोगों को सनबर्न जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, करेंट ट्रैंड के मुताबिक, आर्कटिक के ऊपर यह छेद कुछ हफ़्तों में गायब हो जाएगा।

यूरोपियन स्पेस एजेंसी के वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस सप्ताह यह छेद नॉर्दर्न हेमिस्फियर में अब तक का रिकॉर्ड सबसे बड़ा छेद होगा। जर्नल नेचर के मुताबिक, इस छेद का आकार इतना बड़ा है कि इसमें तीन ग्रीनलैंड समा जाएं।

आख़िरकार ओज़ोन परत के ऊपर ऐसा असामान्य छेद होने का क्या कारण है?

वैज्ञानिकों के मुताबिक, उत्तरी-ध्रुव पर तापमान में अत्यधिक कमी और वातावरण में ब्रोमीन व क्लोरीन की मात्रा बढ़ने जैसी गतिविधियों के कारण ओज़ोन परत में असामान्य छेद हो रहा है और इसका कोरोना वायरस संक्रमण के कारण साफ हो रहे वातावरण से कोई संबंध नहीं है। अभी यह कहना भी बहुत जल्दबाज़ी होगा कि आर्कटिक पोलर वोर्टेक्स कंडीशंस क्लाइमेट क्राइसिस से जुड़ी हैं।

आर्कटिक क्षेत्र के ऊपर क्या ऐसा पहली बार हुआ है?

नहीं, ऐसा नहीं है, यह छेद पहले भी हो चुका है और यह होना नेचुरल है लेकिन इस बार का होल पहली की अपेक्षा काफी बड़ा है।