'कच्चा तेल हुआ सस्ता, इतना कि ख़रीदने पर उल्टा पैसे मिल रहे हैं'

कोरोना वायरस के चलते उत्पादन और परिवहन प्रक्रियाओं के पूरी तरह ठप्प हो जाने से तेल बाज़ार ऐसे संकट में घिर गया है जिसके बारे में कभी नहीं सोचा गया था

- Khidki Desk


दुनिया भर में अलग अलग देशों में कम या अधिक, सख़्ती के साथ लगाए गए लॉकडाउन का असर, अब अर्थव्यवस्थाओं को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले क्षेत्रों में भी दिखने लगा है. दुनिया भर में कच्चे तेल की क़ीमतें बुरी तरह गिरी हैं और अमेरिकी कच्चे तेल की क़ीमत इतिहास में पहली बार ज़ीरो डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे माइनस में चली गई है. सोमवार को अमेरिकी कच्च तेल की कीमतों के बेंचमार्क क्रूड वेस्ट टेक्सेज़ इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) में शुरुआत में कच्चे तेल की कीमत 18.27 डॉलर प्रति बैरल थी जो बाज़ार बंद होते-होते शून्य के भी नीचे चली गई। मंगलवार को यह क़ीमत और गिरते हुए माइनस 37.63 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं. यानि की क्रूड आॅयल बेच रही कंपनियां ग्राहकों को तेल ख़रीदने के लिए पैसे दे रही हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि ये कंपनियां स्टोरेज़ की कमी से जूझ रही हैं. यही हाल अंतराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की कीमतों का भी है. अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट में भी कच्चे तेल के दाम में 8.9 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई. यहां तेल की कीमत 26 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने मौजूदा संकट को कुछ ही समय का संकट बताया है. व्हाइट हाउस के प्रेस ब्रीफ़ में उन्होंने य​ह भी कहा है कि तेल की कीमतों में ​इस गिरावट को वे एक मौक़े की तरह देख रहे हैं जिससे राष्ट्रीय स्ट्रेटेज़िक रिजर्वस् को भरा जा सकेगा.

"तेल की क़ीमतों में रिकॉर्ड गिरावट में कई लोग रुचि दिखा रहे हैं. हम अपने राष्ट्रीय पैट्रोलियम स्ट्रेटज़िक रिजर्वस् को भर रहे हैं. हम कम से कम साढ़े सात करोड़ बैरल कच्चे तेल का यहां संग्रहण करेंगे. किसी ने भी इससे पहले तेल की निगेटिव क़ीमतों के बारे कभी नहीं सुना हो लेकिन यह कुछ ही समय के लिए है. यह संकट जल्द ही टल जाएगा.''

इधर अमेरिका के उर्जा मंत्रालय ने भी तेल के संग्रहण के लिए स्टोरेज़ किराए पर लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस बीच ट्रंप ने कहा है कि वह अमेरिकी तेल उद्योग को इस संकट से बचाने के लिए सउदी अरब के तेल के जहाज़ों पर प्रतिबंध लगाने के बारे में भी सोच सकते हैं. इस बारे में रिपब्लिकन सांसद Kevin Cramer ने ट्रंप को सुझाव दिया था. तेल उत्पादन को कम करने को लेकर पिछले कुछ समय से अंतराष्ट्रीय तेल उत्पादक देशों के बीच काफ़ी बहस रही है. सउदी अरब के नेतृत्व वाले, तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक और रूस के नेतृत्व वाले इसके सहयोगी, एक ऐसे समझौते पर पहुंचे थे जिसके तहत हर रोज़ होने वाले कुल तेल उत्पादन मेें 97 लाख बैरल की कमी लाई जानी थी. कोरोना वायरस के चलते उत्पादन और परिवहन प्रक्रियाओं के पूरी तरह ठप्प हो जाने से तेल बाज़ार ऐसे संकट में घिर गया है जिसके बारे में कभी नहीं सोचा गया था.

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