International Bulletin: ब्राज़ील में लॉकडाउन के विरोध में सड़कों पर प्रदर्शन

आज है 19 अप्रैल, दिन शनिवार, आप पढ़ रहे हैं खिड़की इंटरनेश्नल बुलेटिन. यहां हर रोज़ हम आपके लिए लेकर आते हैं दुनिया भर की अहम ख़बरें.

- Khidki Desk



ब्राज़ील में लॉकडाउन के विरोध में सड़कों पर प्रदर्शन

पहली ख़बर है ब्राज़ील से जहां राष्ट्रपति जैर बोलसोनारो के सैकड़ों समर्थक, लॉकडाउन का​ विरोध करते हुए सड़कों पर उतर आए. ब्राज़ील के शहर रियो डे जैने​रो, साओ पाउलो और राजधानी ब्रासिलिया में ये समर्थक ट्रकों, कारों और मोटरसाइकलों में सवार होकर सड़कों में उतरे थे. इन्होंने ब्राज़ील का झंडा ओढ़ा हुआ था और हॉर्न बजाकर इन शहरों के गवर्नरों से इस्तीफ़ा मांग रहे थे. राष्ट्रपति बोलसोनारो, देश में लॉकडाउन के ख़िलाफ़ हैं जबकि इन शहरों के गवर्नरों ने एहतियातन शहरों में लॉकडाउन की घोषण की थी जिसके चलते पिछले कई हफ़्तों से कई कंपनियों के दफ़्तर आदि बंद किए गए थे. इस प्रदर्शन से ठीक एक दिन पहले ही राष्ट्रपति बोलसोनारो ने अपने स्वास्थ मंत्री ​लुइज़ हैनरिक़ मैंडेटा का मंत्री पद छीन लिया था क्योंकि वे कोरोनावायरस से बचाव के लिए दैहिक दूरी और दूसरी इस तरह के उपायों का प्रोत्साहन कर रहे थे. पूरे लैटिन अमेरिका में ब्राज़ील कोराना वायरस से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है. यहां अब तक 36,500 से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं और कम से कम 2,347 लोगों की मौत हुई है.


अरुंधती रॉय के बयान से विवाद

दूसरी ख़बर कोरोना वायरस से निपटने की कोशिशों को सांप्रदायिक रंग देने के चलते कुछ राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय हलकों में आलोचना का सामना कर रही भारत सरकार को अब मशहूर लेखिका और राजनीतिक कार्यकर्ता अरुंधती रॉय ने आड़े हाथों लिया है। जर्मनी के अंतरराष्ट्रीय प्रसारक डॉयचे वेले को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि भारत में इस समय मुस्लिम समुदाय के प्रति घृणा और हिंसा का माहौल सामूहिक जनसंहार की स्थिति में बदल चुका है। अरुंधति ने कहा कि इस महामारी के बहाने मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने की सरकारी नीति अब सड़कों पर दिखाई देने लगी है जिसे अब हर जगह सुना जा सकता है। उन्होंने भारत में मुस्लिम समुदाय की प्रति फैल रही संगठित हिंसा की ओर इशारा करते हुए बताया, ''इस समय कोविड का इस्तेमाल काफ़ी हद तक वैसे ही किया जा रहा है जैसे नाज़ी जर्मनी में टाइफ़स का इस्तेमाल यहूदियों की घेराबंदी और उन्हें बदनाम करने के लिए किया गया था।'' अरुंधति ने कहा, ''इस सबके पीछे जो संगठन है आरएसएस, जिस संगठन से मोदी ताल्लुक़ रखते हैं, जो कि बीजेपी की मदर शिप है, वो लंबे समय से कहता आया है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र होना चाहिए. उसके विचारक हमेशा भारत में मुसलमानों को ऐसे देखते आए हैं जैसे कि नाज़ी दौर में जर्मनी में यहूदियों को लिया जाता था.'' बता दें कि अरुंधति इससे पहले भी कोरोना वायरस से निपटने के भारत सरकार के तौर-तरीकों की आलोचना करती रही हैं। बीती 3 अप्रैल को फाइनेंशिल टाइम्स अखबार में लिखे एक लेख में उन्होंने कहा था कि जब चीन में दिसंबर में इस वायरस का प्रसार हो रहा था तब भारत सरकार ने अपनी सारी ताकत नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ़ चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को दबाने में लगाई हुई थी। अपने इसी लेख में उन्होंने राजधानी दिल्ली में कुछ महीनों हुए दंगों में मुस्लिम समुदाय को संगठित तरीके से निशाना बनाने की भी आलोचना की थी। वहीं भारत सरकार लगातार कोरोना महामारी को समुदाय विशेष से जोड़कर देखने के चलते सवालों के घेरे में है। कहा जा रहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी और खुद बीती 8 अप्रैल को जारी भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के बावजूद स्वास्थ्य और गृह मंत्रालय अपनी संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग में कोविड-19 के प्रसार के लिए समुदाय विशेष को ज़िम्मेदार बता रहे हैं।


अस्थिर लेसूथो में प्रधानमंत्री ने सेना को सड़क पर उतारा

बढ़ते हैं अगली ख़बर की ओर। अस्थिरता से घिरे अफ़्रीकी देश लेसूथो के प्रधानमंत्री थॉमस थाबाने ने स्थिति पर क़ाबू पाने के लिए अब सड़कों पर सेना को उतार दिया है. इससे पहले प्रधानमंत्री ने संसद को भंग करने का निर्णय लिया था लेकिन शनिवार को संवैधानिक अदालत ने प्रधानमंत्री के इस निर्णय के ख़िलाफ़ आदेश दे दिया. इधर सरकारी टीवी चैनल पर एक लाइव प्रसारण में प्रधानमंत्री थाबाने ने नाम लिए बग़ैर कु​छ वरिष्ठ क़ानूनी अधिकारियों पर लोकतंत्र की अनदेखी का आरोप लगाया है. ऐसी भी ख़बर आ रही है लेसूथो के पुलिस कमिश्नर और उप कमिश्नर को सेना ने ग़िरफ़्तार कर लिया है. वेटिकन सिटी और सेन मेरिनो के अलावा दक्षिण अफ़्रीका के दक्षिणी हिस्से में बसा यह छोटा सा अफ़्रीकी देश लेसूथो ही ऐसा देश है ​जो कि पूरी तरह किसी दूसरे देश के बीच में बसा है. यह 30 हज़ार वर्ग किलोमीटर में बसा देश है जिसकी आबादी 20 लाख के क़रीब है।


मध्य पूर्व में सबसे अधिक संक्रमण तुर्की में ईरान को पीछे छोड़ा

इधर तुर्की में कोरोना वायरस से संक्रमण के 82 हज़ार 329 मामले आए हैं. मध्य पूर्वी देशों में अब तुर्की संक्रमण के मामले में पड़ोसी देश ईरान को पीछे छोड़ता हुआ सबसे आगे जा पहुंचा है. इसबीच ईरान ने राजधानी तेहरान में अब लॉकडाउन में कुछ ढील देनी शुरू की है. कम ख़तरे वाले व्यापारों के संचालन की इजाज़त दी जा रही है जिसमें दुकानें, कुछ फ़ैक्ट्रियां और वेयरहाउस शामिल हैं. लेकिन अल्ज़ीरिया, मोरक्को, क्रोएशिया और स्पेन में लॉकडाउन की अ​वधि बढ़ा दी गई है.

कोरोना प्रकोप

पूरी दुनिया में अब तक संक्रमित हुए लोगों की तादात 2,345,331 पहुंच गई है. 1,61,191 मौतें हुई हैं और 6,04,596 लोग ठीक भी हुए हैं.

( यहां बताए गए सारे आंकड़े वल्डोमीटर www.worldometers.info से लिए गए हैं.)


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