सोनिया गांधी का प्रधानमंत्री को पत्र, 'ग़ैर ज़रूरी ख़र्च करें बंद, कोरोना से लड़ने में लगाएं बजट'

सोनिया गांधी ने अपने इस पत्र में मुख्यत: 5 बिंदुओं पर बात की है और उन्होंने कहा है कि इस वायरस से उपजे संकट से निपटने के लिए भारत को अपने उन खर्चों को टाल देना चाहिए जो कि ग़ैर ज़रूरी हैं.

- Khidki Desk


देश की विपक्षी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिख कर कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें फ़ोन किया था और इस संदर्भ में देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी की मुखिया होने के नाते उनसे सुझाव मांगे थे. प्रधानमंत्री ने और भी दूसरे ​वरिष्ठ नेताओं को इस बाबत फ़ोन किया है. सोनिया गांधी ने अपने इस पत्र में मुख्यत: 5 बिंदुओं पर बात की है और उन्होंने कहा है कि इस वायरस से उपजे संकट से निपटने के लिए भारत को अपने उन खर्चों को टाल देना चाहिए जो कि ग़ैर ज़रूरी हैं.

उन्होंने पहले बिंदु में कहा है कि, दो सालों के लिए सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की अधिग्रहित कंपनियों की ओर से दिए जाने वाले टीवी, प्रिंट और ऑनलाइन मीडिया विज्ञापनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाए। उन्होंने लिखा है, ''जैसा कि केंद्र सरकार मौजूदा समय में औसतन 1250 करोड़ रूपया मीडिया विज्ञापनों में ख़र्च करती है (जिसमें मैंने पीएसयू की ओर से होने वाले तक़रीबन इतने ही या ​इससे ​भी अधिक विज्ञापन ख़र्चों को शामिल नहीं किया है). अगर इस ख़र्च को रोक दिया जाए तो कोविड-19 के आर्थिक और सामाजिक प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

दूसरे बिंदु में गांधी ने नए संसद भवन की एक महत्वाकांक्षी योजना सेंट्रल विस्टा को टालने की अपील की है जिसका ख़र्च 20 हज़ार करोड़ रूपया है. उन्होंने लिखा है, ''मैं यक़ीन के साथ कह सकती हूं कि संसद मौजूदा ऐतिहासिक इमारत में ही आराम से चल सकती है.'' उन्होंने कहा है कि इसके बजाय इस राशि को नए अस्पतालों, डायग्नॉस्टिक सेंटरों और हमारे स्वास्थ कर्मियों के लिए पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट और बेहतर ​सुविधाओं में ख़र्च किया जा सकता है. इसके साथ ही सरकारी विज्ञापनों को रोकने और प्रधानमंत्री, मंत्रियों और नौकरशाहों की विदेश दौरों में कमी करने का आह्वान भी सोनिया गांधी ने किया है.