सीरियाई गृहयुद्ध के 10 साल पूरे, हर तरफ तबाही का मंज़र

सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद के ख़िलाफ़ पैदा हुए असंतोष के बाद उभरे, आंदोलन और फिर गृहयुद्ध के एक अंतहीन सिलसिले की शुरूआत को अब दस साल पूरे हो गए हैं. मार्च 2011 में शुरू हुए इस सिलसिले में सीरिया ने तबाही का जो मंज़र देखा है वह हालिया इतिहास में किसी भी दूसरे देश ने नहीं देखा. निहित स्वार्थों की राजनीति से उपजे इस संकट के बीच मानवीय त्रासदी का यह भयानक मंज़र अब तक लाखों लोगों की जानें ले चुका है और लाखों लोग अपने घरों से बाहर गहरे समुद्र की यात्राएं कर भूख और बदहाली के बोझ तले दूसरे देशों में पनाह मांगने को मजबूर हुए हैं. इन दस सालों में सीरिया के हालात की तस्वीर खींचती एक रिपोर्ट -

- Khidki Desk


सीरिया में गृहयुद्ध शुरू होने के दस साल पूरे हो गए हैं. वर्ष 2000 में अपने पिता हाफिज़ अल असद की जगह सत्ता पर क़ाबिज़ हुए बशर अल असद के भ्रष्ट और तानाशाही शासन के ख़िलाफ़ मार्च 2011 में बग़ावत शुरू हुई.


अरब के कई देशों में सत्ता के विरोध में बगावत यानी अरब स्प्रिंग से प्रेरित होकर दक्षिण सीरिया के शहर दाराआ से शुरू हुआ शांतिपूर्ण प्रदर्शन धीरे-धीरे पूरी तरह से गृहयुद्ध में तब्दील हो गया. एक दशक के संघर्ष के बावजूद वहां कोई बदलाव नहीं दिखता, बल्कि ईरान और रूस की मदद से असद अब भी सीरिया की सत्ता पर क़ाबिज़ हैं.


बदला तो बस इतना है कि इन दस सालों में सीरिया के तक़रीबन पांच लाख लोग अपनी जान गवां चुके हैं. हालांकि ढाई लाख मौत के आंकड़ों के बाद संयुक्त राष्ट्र ने भी 2015 के बाद अपडेट बंद कर दिया.

लाखों लोग दूसरे देशों में शरणार्थी बनकर रह रहे हैं और दसियों हज़ार लोग लापता हैं. शहर के शहर इस हद तक तबाह हो चुके हैं कि उनको ​दोबारा बनाना नामुमकिन सा लगता है. भीड़भाड़ और बाज़ार से गुलज़ार रहने वाले चौक-चौराहों की जगह अब बमबारी से खंडहर हो गए कंक्रीट के ढेर दिखाई देते हैं.


लाखों लोग इस क़दर ग़रीबी के दलदल में हैं कि अगले वक़्त के खाने का भी भरोसा नहीं.


असद और विद्रोहियों के बीच की जंग इतनी आगे निकल गई कि उनके समर्थन में ईरान और रूस के आने के बाद सउदी अरब और अमेरिका की भी दख़लंदाज़ी हुई.


क्षेत्रीय और दुनिया की ताक़तों के सीरिया में हस्तक्षेप के बाद यह देश एक छद्म युद्ध का रणक्षेत्र बनकर रह गया है. इसे शिया बनाम सुन्नी के संघर्ष के तौर पर भी देखा गया. हालांकि जिस शिया समुदाय से असद का ताल्लुक़ हैं उनकी आबादी सीरिया में महज 13 फीसदी ही है, जबकि सुन्नी आबादी यहां 70 प्रतिशत है.

गृहयुद्ध के बीच सीरिया की ज़मीन को ज़िहादी संगठनों ने भी अपना ठिकाना बना लिया. इस्लामिक स्टेट, अलक़ायदा से जुड़े अल नुसरा फ्रंट और तुर्की के कुर्द लडाकों ने भी अपनी जड़ें जमाई हैं.


संयुक्त राष्ट्र की ओर से गठित UN Commission of Inquiry on the Syrian Arab Republic की एक नई जांच रिपोर्ट के मुताबिक़ पिछले 10 सालों में सीरिया में गृहयुद्ध के दौरान मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए दसियों हज़ार लोग अब तक ग़ायब हैं.


सीरियाई गृहयुद्ध में शामिल सभी धड़ों की ओर से किए गए युद्ध अपराधों और मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों की पड़ताल करती इस रिपोर्ट के मुताबिक़ हज़ारों लोगों को हिरासत में या तो भयानक यातनाएं दी गईं या उन्हें मार डाला गया.


इन यातनाओं के शिकार लोगों या गवाहों के हवाले से इस रिपोर्ट में कहा है कि इस दौर में सीरियाई नागरिक अकल्पनीय यातनाओं से गुजरे हैं, जिनमें लड़कियों और छोटे बच्चों के बलात्कार की घटनाएं भी शामिल हैं.


रिपोर्ट में इन मसले को एक 'नैश्नल ट्रॉमा' कहा गया है, और कहा गया है कि इस नैश्नल ट्रामा को एड्रेस किया जाना चाहिए. UNHRC के इस स्वतंत्र कमिशन की यह रिपोर्ट 2650 से अधिक लोगों के साक्षात्कार और 100 से अधिक डिटेंशन सेंटर्स की जांच पर आधारित है. इस रिपोर्ट के मु​ताबिक़ सीरिया के मौजूदा गृहयुद्ध में शामिल हर एक महत्वपूर्ण गुट मानवाधिकारों के उल्लंघन और युद्ध अपराध में शामिल है.


जहां एक ओर इस रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र की ओर से आतंकवादी घोषित, हयात तहरीर अल शाम और इस्लामिक स्टेट के अपराधों की पड़ताल है तो वहीं यह रिपोर्ट सरकार, हथियार बंद समूहों जैसे फ्री सीरियन आर्मी, ​सीरियन नेश्नल आर्मी और सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज़ की ओर से व्यापक स्तर पर किए गए डिटेंशन, अपहरणों जैसे अपराधों और दमन की भी पड़ताल करती है.


कमिशन के प्रमुख, पाउलो पिन्हेरियो का कहना है, ''सरकारी सेनाओं ने मनमाने तौर पर राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों की ग़िरफ्तारियां कीं, यह मौजूदा हालात की बुनियादी वजह बना और इसने सीरिया में इन हालात को बढ़ावा दिया. सभी हथियारबंद समूहों और संयुक्तराष्ट्र की ओर से आतंकवादी घोषित संगठनों ने लोगों से उनकी आज़ादी छीन ली और उनके ख़िलाफ़ जघन्य अपराध किये.''\\



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