अफगानिस्तान में जगी अमन की उम्मीद

ईद अल अजहा के दौरान अफगान सरकार और तालिबान के बीच युद्धविराम तीसरे दिन भी जारी रहा, जिसमें दोनों पक्षों ने एक दूसरे के कैदियों को रिहा किया है और आगे शांति वार्ता की राह खुल गई है.
khidki desk

अफगानिस्तान में ईद अज अजहा के मौके पर सरकार और तालिबान के बीच घोषित युद्धविराम तीसरे दिन भी जारी रहा और इससे दोनों पक्षों के बीच शांति स्थापित करने की कोशिशों में सकारात्मकता दिखी है. ईद अज अजहा के पहले दिन शुक्रवार से लेकर रविवार तक अफगान सरकार ने जेलों में बंद 317 तालिबान लड़ाकों को रिहा कर दिया.


वहीं तालिबान ने भी कहा है कि उसने फरवरी में हुए समझौते के मुताबिक एक हजार सरकारी सुरक्षा बलों को रिहा कर दिया है. देश की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने रविवार को ट्वीट करके यह जानकारी दी. परिषद के मुताबिक अभी रिहा किए गए कैदियों को मिलाकर अब तक सरकार की ओर से छोड़े गए तालिबान कैदियों की तादाद 4917 हो गई है.


इस दौरान अफगानिस्तान के अधिकांश हिस्सों में शांति बनी रही और सरकार की ओर से कहीं से भी किसी बड़ी हिंसक वारदात की खबर नहीं दी गई है. हालांकि अशरफ गनी ने कहा कि देश के संविधान के मुताबिक उन्हें जेल में बंद बाकी बचे 400 तालिबानियों को रिहा करने का अधिकार नहीं, क्योंकि वे गंभीर अपराधों में शामिल रहे हैं. उनके बारे में फैसला लेने के लिए जल्द ही लोया जिरगा से परामर्श लिया जाएगा.


राष्ट्रपति अशरफ गनी और तालिबान दोनों ने संकेत दिए हैं कि काफी वक्त से ठप पड़ी शांति वार्ता ईद के तुरंत बाद शुरू की जा सकती है. इस वर्ष फरवरी में अमेरिका और तालिबान के बीच हुए समझौते के तहत मार्च में अफगानिस्तान के अंदर विभिन्न पक्षों के बीच वार्ता होनी थी, लेकिन काबुल में राजनीतिक रस्साकशी और कैदियों की अदलाबदली के मामले में पेंच फंसने से वार्ता अब तक टलती रही. उस समझौते के मुताबिक सरकार को पांच हजार तालिबान कैदियों को रिहा करना था, जिसके बदले में तालिबान एक हजार अफगान सरकार के सुरक्षा बलों को अपने कब्जे से मुक्त करता.

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