बंद हो गया ओज़ोन परत में हुआ सबसे बड़ा छेद

इस छेद की निगरानी कर रहे कॉपर्निकस एटमॉस्फ़ियर मॉनिटरिंग सर्विस (CAMS) ने कहा है कि अब यह छेद बंद हो गया है और इसके उभरने का कोई भी संबंध जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वॉर्मिंग और कोरोनावायरस के लॉकडाउन से वायु प्रदूषण में हुई कमी से नहीं था.

— Khidki Science Desk


पिछले दिनों ओज़ोन परत में हुआ एक बड़ा छेद अब बंद हो गया है. यह दावा कॉपर्निकस एटमॉस्फ़ियर मॉनिटरिंग सर्विस (CAMS) ने​ किया है. CAMS का यह भी दावा है कि इस छेद के उभरने और बंद हो जाने का जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वॉर्मिंग, या कोरोनावायरस लॉकडाउन के चलते वायु प्रदूषण में आई कमी से इसका कोई लेना देना नहीं है. बताया गया है कि यह स्वाभाविक रूप से होने वाली प्रक्रियाएं हैं.


CAMS ने पिछले दिनों आर्कटिक के ऊपर ओजोन परत में असामान्य रूप से उत्पन्न हुए एक बड़े छेद निगरानी की थी. अपने अध्ययन के बाद उसने सूचना दी है कि 23 अप्रैल को यह छेद पूरी तरह बंद हो गया है. CAMS के कहा है ​कि अंटार्कटिक के ऊपर इस तरह के छेद, छोटे आकारों में होना आम तौर पर होता रहता है.

''लेकिन इस तरह के छेदों के लिए जो स्थिति चाहिए होती है वह आमतौर पर उत्तरी गोलार्ध में नहीं पाई जाती हैं।''

CAMS रिपोर्ट के अनुसार, आर्कटिक (उत्तरी गोलार्ध ) का समताप मंडल आमतौर पर अंटार्कटिक (दक्षिणी गोलार्ध ) की तुलना में कम एकाकी है, इसकी वजह उत्तरी गोलार्ध में पर्वत श्रृंखलाओं और भू- द्रव्यमानों का अधिक उपस्थिति होना है. यह दक्षिणी गोलार्ध की तुलना में मौसम के पैटर्न को अधिक परेशान करती है. इस साल, हालांकि एक विशेष रूप से मज़बूत ध्रुवीय भंवर, आर्कटिक ओज़ोन छेद की वजह बना. इसने ओज़ोन परत में लगभग 11 मील तक का छेद कर दिया था. इस तरह की घटना इससे पहले आर्कटिक में दस साल पहले देखी गई थी. हालांकि उसमें भी इतना बड़ा छेद नहीं हुआ था. तो, इस साल ऐसा क्यों हुआ? वैज्ञानिको का मानना है कि

आर्कटिक के ऊपर ओज़ोन की सबसे कम सांद्रता तब होती है जब समताप मंडल में सबसे ठंडे और सबसे मजबूत ध्रुवीय भंवर का सौर ऊर्जा के न्यूनतम होने के साथ संयोजन होता है, और इस साल यह लम्बे समय तक हुआ है.

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