कोरोना की छाया में एड्स का ख़तरा

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन के बीच दवाओं के उत्पादन और सप्लाई में पहुंची बाधा और इलाज़ में आई कमी के चलते पूरी दुनिया में एड्स के मरीज़ों की अनदेखी हो रही है. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर ऐसा लंबे समय तक चलता रहा तो एड्स के तक़रीबन पांच लाख अतिरिक्त मरीज़ों के मौत के मुंह में चले जाने का खतरा है.

- शादाब हसन खान


कोरोनावायरस के प्रकोप के बीच, दुनिया भर के कई एड्स विशेषज्ञों और मरीज़ों की मौजूदगी में हर साल होने वाली इंटरनेश्नल एड्स कॉंफ्रेंस, इस बार वीडियो कॉंफ्रेंसिंग के ज़रिए आयोजित की गई.


WHO की एक नई रिपोर्ट में जताई गई आशंकाओं ने इस कॉंफ्रेंस को भी कोरोनावायरस महामारी से उपजे नए सवालों से ही घेरे रखा.


इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन के बीच दवाओं के उत्पादन और सप्लाई में पहुंची बाधा और इलाज़ में आई कमी के चलते पूरी दुनिया में एड्स के मरीज़ों की अनदेखी हो रही है.


रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर ऐसा लंबे समय तक चलता रहा तो एड्स के तक़रीबन पांच लाख अतिरिक्त मरीज़ों के मौत के मुंह में चले जाने का खतरा है.


कॉंफ्रेंस में UNAIDS की निदेश Winnie Byanyima ने कहा —


"हमें रिपोर्ट्स मिल रही हैं कि कोरोना वायरस के कारण एड्स के इलाज की सुविधाएं और केंद्र बंद हो रहे हैं. आपूर्ति की चेन बाधित हो रही है. देशों की सीमाएं बंद हो रही हैं. लॉकडाउन के उपाय सबसे कमज़ोर तबकों को नुक़सान पहुंचा रहे हैं और स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच को प्रभावित कर रहे हैं. इसलिए हमने इस मामले पर कुछ अध्ययन किए हैं और उससे मिले नतीज़ों के प्रति दुनिया को आगाह किया है."

इधर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने कहा COVID-19 और एड्स की साझा चुनौतियों के बारे में चिंता जताते हुए कहा -


''कोविड-19 भी इससे पहले की एचआईवी महामारी की तरह ही, हमारी दुनिया की कमज़ोरियों को उभार रहा है, जिसमें आर्थिक और सामाजिक असमानता और जन स्वास्थ पर किया गया अपर्याप्त निवेश शामिल है.''

2019 में लगभग 17 लाख लोग एड्स से ग्रसित हुए हैं और इस समय दुनियाभर में 4 करोड़ लोग एचआईवी पॉजिटिव हैं.


सुयंक्त राष्ट्र की सालाना रिपोर्ट बताती है कि 2020 में एड्स से होने वाली मौतों को और नए संक्रमणों को पांच लाख से नीचे रखने का लक्ष्य अब पूरा नहीं किया जा सकेगा.


हालांकि 2004 में एड्स के भयानक उभार के बाद चलाए गए अभियानों के बाद एड्स से होने वाली मौतों में 60 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई. लेकिन पिछले साल भी 6 लाख 90 हज़ार लोग एड्स की वजह से मारे गए थे.