भारतीय न्यायिक इतिहास के सबसे बड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आज

इसे आज़ादी के बाद से भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा विवाद कहा जाना अतिश्योक्ति नहीं होगी. इस मसले पर आज भारतीय सुप्रीम कोर्ट अपना ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाने जा रहा है. इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए देश भर में प्रशासनिक मुस्तै​दी दिखाई दे रही है.

- Khdiki Desk


इसे आज़ादी के बाद से भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा विवाद कहा जाना अतिश्योक्ति नहीं होगी. इस मसले पर आज भारतीय सुप्रीम कोर्ट अपना ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाने जा रहा है. इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए देश भर में प्रशासनिक मुस्तै​दी दिखाई दे रही है. पैरामिलिट्री फोर्सेज़ की तैनाती सभी संवेदनशील इलाक़ों में कर दी गई है और सरकारी स्कूलों और दफ्तरों में अवकाश घोषित कर दिया है.


ज़िम्मेदार अधिकारियों और नेताओं ने शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है. हिंसा भड़कने की आशंका पर इसी क्रम में सैकड़ों लोगों को नज़रबंद किया गया है.


क़ानूनी दायरे में दशकों तक भटकते रहे, भारतीय सामाजिक तानेबाने को झक़झोर कर रख देने वाले बाबरी मस्ज़िद और राम जन्मभूमि विवाद पर आज भारत की सर्वोच्च अदालत अपना फ़ैसला सुना रही है.


भारत के हिंदुओं का एक तबका मानता है कि बाबरी मस्ज़िद को राम जन्म भू​मि पर पूर्व स्थापित एक मंदिर को तोड़ कर बनाया गया था. उनका कहना है कि इस स्थान पर दोबारा एक मंदिर बनाया जाना चाहिए. ज​ब्कि मुसल्मानों को इस बात का अक्रोश है कि जिस बाबरी मस्ज़िद पर वे पीढ़ियों से नमाज़ पढ़ते रहे उसे एक षड़्यंत्र के तहत ढहाया गया था.


सर्वोच्च अदालत आज (शनिवार को) 10:30 बजे अपना फ़ैसला सुनाएगी.


बीबीसी हिंदी सेवा ने इस पूरे मसले पर एतिहासिक क्रमवार एक आलेख प्रकाशित किया है जिसमें इस अयोध्या के इस विवाद को तफ़सील से जाना जा सकता है. 'संपूर्ण अयोध्या कांड' शीर्षक से प्रकाशित वरिष्ठ पत्रकार राम दत्त त्रिपाठी के इस आलेख का लिंक यहां इसी आशय से दिया जा रहा है कि पाठक अयोध्या की बाबरी मस्ज़िद से जुड़े इस विवाद को इसके ​इतिहास के साथ जान समझ सकें.


​इस लिंक में पढ़ें 'संपूर्ण अयोध्या कांड'

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