ट्रम्प ने WHO का बजट रोका

व्हाइट हाउस में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ट्रंप ने यह घोषणा करते हुए कहा, ''आज मैं अपने प्रशासन को निर्देश दे रहा हूं कि वह विश्व स्वास्थ संगठन की फंडिंग को तब तक के लिए रोक दे जब तक हम (कोरोना से जुड़े) प्रबंधन में हुई कुछ गड़बड़ियों और (देशों की) ग़लतियों को छिपाने की में विश्व स्वास्थ संगठन की भूमिका की समी​क्षा नहीं कर लेते."

- Khidki Desk


जब पूरी दुनिया कोरोनावायरस के प्रकोप से जूझ रही है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने एक ऐसा फ़ैसला ले लिया है जिसका दुनिया भर में कोरोना के ख़िलाफ़ जारी लड़ाई में नकारात्मक असर पड़ना है. अमेरिका ने विश्व स्वास्थ संगठन यानि WHO के बजट को रोक दिया है.

व्हाइट हाउस में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ट्रंप ने यह घोषणा करते हुए कहा, ''आज मैं अपने प्रशासन को निर्देश दे रहा हूं कि वह विश्व स्वास्थ संगठन की फंडिंग को तब तक के लिए रोक दे जब तक हम (कोरोना से जुड़े) प्रबंधन में हुई कुछ गड़बड़ियों और ग़लतियों को छिपाने की में विश्व स्वास्थ संगठन की भूमिका की समी​क्षा नहीं कर लेते." उन्होंने आगे कहा, "WHO अपने बुनियादी दायित्वों को पूरा करने में नाक़ामयाब रहा है और उसकी जवाबदेही होनी चाहिए. कई दशकों के बाद अब यह समय आ गया है.'' अमेरिका का यह क़दम कोरोनावायरस की तबाही के बीच मार्च में WHO की ओर से की गई अपील के ठीक उलट है जिसमें कहा गया था कि इस महामारी से निपटने के लिए WHO को कम से कम 1 ​बीलियन अमेरिकी डॉलर्स की ज़रूरत है. अमेरिका WHO का सबसे बड़ा कंट्रिब्यूटर रहा है. पिछले साल इसने WHO को 400 ​मिलियन अमेरिकी डॉलर्स का कंट्रिब्यूशन दिया था जो कि उसके कुल बजट का 15 प्रतिशत है.


इससे पहले ट्रम्प ने WHO चीन के प्रति झुकाव रखने का आरोप लगाया था. इधर अमेरिका के इस क़दम की संयुक्त राष्ट्र ने आलोचना की है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने कहा है कि यह WHO के फंड को रोकने का समय नहीं है. वहीं अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ पैट्रिस हैरिस ने इसे एक ख़तरना क़दम बताते हुए कहा है, ''यह ग़लत दिशा में उठाया गया एक ख़तरनाक क़दम है इससे कोविड—19 को हराना आसान नहीं रह जाएगा.''


अब तक अमेरिका दुनिया का कोरोना वायरस से सबसे बुरी तरह प्रभावित देश रहा है, यहां 608377 मामले दर्ज हुए हैं जबकि 26 हज़ार के अधिक लोगों की मौत हुई है.