'ट्रम्प ने की चीन से विनती'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प पर अमेरिकी चुनावों से ठीक पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने अपनी एक आने वाली किताब में आरोप लगाया है कि ट्रम्प ने चीनी राष्ट्रपति शी ज़िनपिंग से उन्हें चुनावों में जीत दिलाने के लिए मदद मांगी थी. इस ख़बर ने अमेरिकी राजनीति में हलचल ला दी है.

- Khidki Desk



कोरोनावायरस के प्रकोप के बीचे पिछले दिनों लगातार चीन पर बौख़लाहट भरे डोनल्ड ट्रम्प के बयानों ने अमेरिका और चीन के संबंधों को क़ाफ़ी तनावपूर्ण बना दिया था. अब ट्रम्प सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे जॉन बोल्टन की एक नई किताब आ रही है जिसके दावे कुछ और ही उद्घाटित करते दिख रहे हैं.


अमेरिकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने बुधवार को एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें जॉन बॉल्टन की इस किताब के हवाले से कहा गया है कि डोनल्ड ट्रम्प ने जून 2019 में ओसाका में हुई एक क्लोज़ डोर मीटिंग में चीन के राष्ट्रपति शी ज़िंनपिंग से नवंबर 2020 में होने वाले अमेरिकी चुनावों में उन्हें जिताने में मदद करने की ग़ुजारिश की थी.


रिपोर्ट के मुताबिक़ व्यापार के लिए हो रही बातचीत के बीच ही ट्रम्प ने ज़िनपिंग से कहा था कि वह जापान के ​ज़रिए अमेरिकी कृषि उत्पादों को ख़रीदे जिससे कि ख़ेती पर निर्भर अमेरिकी राज्यों में आगामी चुनावों में उन्हें जीत में मदद मिल सके.


न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉशिंग्टन पोस्ट को बोल्टन की इस किताब The Room Where it Happened: A White House Memoir की एक प्रमोश्नल कॉपी रिलीज़ से पहले ही उपलब्ध कराई गई है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने किताब के एक अंश को कोट करते हुए लिखा है,

''फिर ट्रम्प, आश्चर्यजनक रूप से, चीन की आर्थिक क्षमताओं का गुणगाान करते हुए, बातचीत को आने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों पर ले आए, और शी से विनती करने लगे कि उनकी ही जीत हो.''

न्यूयॉर्क टाइम्स के ​मुताबिक बोल्टन ने आगे लिखा है,


''उन्होंने चुनावों के लिहाज से किसानों के महत्व पर ज़ोर डाला और इस पर भी कि सोयाबीन और गेहूं की चीन की ख़रीद चुनाव में उन्हें फ़ायदा पहुंचाएगी.''

इसी ​मीटिंग का ज़िक्र करते हुए वॉशिंग्टन पोस्ट ने लिखा है,

''ज़िनपिंग ने इस मीटिंग में 10 लाख उइग़र मुसलमानों के लिए बनाए जा रहे कैंपों का बचाव किया और ट्रम्प ने इस पर कहा कि शी कैंप बनाना जारी रखें, ट्रम्प यही करने को बिल्कुल सही मानते थे.''

यह किताब 23 जून को रिलीज़ होनी है लेकिन ट्रम्प हुक़ूमत ने इस किताब के वितरण पर यह कहते हुए मुक़दमा दायर किया है कि इसमें गोपनीय जानकारियों को सार्वजनकि किया है और राष्ट्रीय सुरक्षा को ताक़ पर रखा गया है. इस बारे में जारी क़ानूनी आदेश में कहा गया है,

''इस किताब के प्रकाशन से अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को अप्रत्याशित रूप से ऐसा गहरा नुक़सान पहुंचेगा जिसे कभी ठीक नहीं किया जा सकता है।''

बॉल्टन ने सितम्बर 2019 में तक़रीबन 17 महीने का कार्यकाल पूरा करने के बाद इस्तीफ़ा दे​ दिया था. हालांकि ट्रम्प ने दावा किया बर्खास्त किया था ट्रम्प का कहना था कि उत्तर कोरिया, ईरान, युक्रेन और अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान को लेकर इन दोनों में असहमति थी.


इधर किताब के प्रकाशक साइमन एंड श्युस्टर ने कहा है कि राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से किया गया यह मुक़दमा किताब के प्रकाशन को रोकने के लिए है और यह राष्ट्रपति की गरिमा के ख़िलाफ़ है. प्रकाशक ने कहा है कि लेखक ने राष्ट्रीय सुरक्षा के सभी प्रावधानों का ख़्याल रखते हुए ही यह किताब लिखी है.


हालांकि इस किताब का प्रकाशन अभी संशय में है लेकिन यह बात तय है कि इस किताब में अमेरिका और दुनिया की राजनिति के कई ऐसे पन्नों का सारांक्ष है हो जो कि आमतौर सार्वजनिक नहीं होते. यह किताब अमेरिकी चुनावों से ठीक पहले आ रही है तो चुनावों पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक है.

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