ट्रंप का ह्यूस्टन में चीनी वाणिज्य दूतावास बंद करने का आदेश, तनाव गहराया

सिर पर खड़े चुनावों के दौरान लगातार ट्रम्प चीन पर सख़्त रवैया अपनाते दिखाई दे रहे हैं जिसे उनकी एक चुनावी स्ट्रैटजी के तौर पर देखा जा रहा है. चीन के वाणिज्य दूतावास के ख़िलाफ़ इस क़दम को भी उसी सिलसिले के तौर पर देखा जा रहा है.

- Khidki Desk


बुधवार को अमेरिका की ओर से ह्यूस्टन में चीनी वाणिज्य दूतावास को बंद करने का आदेश देने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया है. जहां इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए चीन ने इस आदेश की निंदा की और इसे अपमानजनक बताते हुए कहा कि अगर इस फैसले को वापस नहीं लिया गया तो कड़ा जवाब दिया जाएगा. वहीं अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के अन्य वाणिज्य दूतावासों को भी बंद करने के संकेत दिए हैं. अमेरिका में चीन के कुल छह वाणिज्य दूतावास हैं.


सिर पर खड़े चुनावों के दौरान लगातार ट्रम्प चीन पर सख़्त रवैया अपनाते दिखाई दे रहे हैं जिसे उनकी एक चुनावी स्ट्रैटजी के तौर पर देखा जा रहा है. चीन के वाणिज्य दूतावास के ख़िलाफ़ इस क़दम को भी उसी सिलसिले के तौर पर देखा जा रहा है.


बुधवार को चीन की सरकारी मीडिया ने अमेरिका के इस क़दम पर सख़्त रुख़ अपनाते हुए कहा था कि नवम्बर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले ट्रंप अपनी नाकामियों का ठीकरा चीन के सिर फोड़ रहे हैं. ये क़दम ऐसे समय उठाए गए हैं, जब ट्रंप ने अमेरिका में कोरोना वायरस फैलाने के लिए चीन को ज़िम्मेदार ठहराया है. दोनों देशों के बीच न केवल कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर बल्कि व्यापार, मानवाधिकारों, हांगकांग और दक्षिण चीन सागर में चीन के दावे को लेकर भी तनाव चल रहा है.


ट्रंप ने कहा कि अगर चीन अपना व्यवहार नहीं बदलता है तो दूसरे दूतावासों को भी बंद किया जा सकता है. उन्होंने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा कि ऐसा हमेशा संभव है. विदेश विभाग ने कहा कि उसने 72 घंटों के भीतर वाणिज्य दूतावास को बंद करने का आदेश दिया है. उसने आरोप लगाया कि चीनी एजेंटों ने टेक्सास में संस्थानों से डेटा चुराने की कोशिश की. व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फे्रंस के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ह्यूस्टन के वाणिज्य दूतावास से आग की लपटें दिखाई दीं, जिससे पता चलता है कि वहां काग़ज़ात जलाए जा रहे हैं.


चीन के महावाणिज्यिक दूत काई वेई ने कहा कि बंद करने का आदेश पूरी तरह ग़लत और अमेरिका-चीन संबंधों को बहुत नुक़सान पहुंचाने वाला है. जासूसी और डेटा चुराने के आरोपों पर काई ने कहा, 'आपको सबूत देने होंगे, तथ्यों के आधार पर कुछ कहें... आपके पास कानून की व्यवस्था है, जब तक आप दोषी साबित नहीं होते तब तक आप दोषी नहीं होते.'


विदेश विभाग की प्रवक्ता मोर्गन ओर्टागस ने एक बयान में कहा कि दूतावास बंद करने का उद्देश्य अमेरिका की बौद्धिक संपदा और अमेरिकियों की निजी सूचना की सुरक्षा करना है. वहीं चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा, ‘ह्यूस्टन में इतने कम समय में चीन के वाणिज्य दूतावास को बंद करने का एकतरफा फैसला चीन के खिलाफ हाल में उठाए उसके कदमों में अभूतपूर्व तेजी दिखाता है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका अपना फैसला नहीं पलटता है तो उसे इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे.