भारत की दो लड़कियों ने खोजा एस्टेरॉइड

अंतरिक्ष में तैरते एस्टेरॉइड और धूमकेतु अक्सर पृथ्वी के लिए ख़तरा माने जाते हैं. 2013 में भी रूस के आकाश में एफिल टावर जितना भारी एक एस्टेरॉइड फटा था जिसकी शॉकवेब से एक हज़ार से ज्यादा लोग घायल हुए थे.

- Khidki Desk

भारत की दो स्कूली छात्राओं ने यूनिवर्सिटी ऑफ़ हवाई के एक टैलेस्कोप से ली गई तस्वीरों का अध्ययन करते हुए एक अर्थ बाउंड एस्टेरॉइड यानि एक उल्का पिंड की खोज की है. भारतीय अंतरिक्ष शिक्षा संस्थान की ओर से सोमवार को इस बारे में जानकारी दी गई.


वैदेही वेकारीय और राधिका लखानी गुजरात के सूरत शहर से हैं. SPACE India नाम के जिस निजी संस्थान के में इन लड़कियों ने ट्रेनिंग ली है, उस संस्थान का कहना है कि यह एस्टेरॉइड अभी मंगल ग्रह के पास ​है और माना जा रहा है कि इसकी कक्षा को पृथ्वी की कक्षा को क्रॉस करने में 10 लाख सालों का समय लगेगा.


फिलहाल इस एस्टेरॉइड को HLV2514 नाम दिया है. हालाँकि आधिकारिक नामकरण इसकी कक्षा निर्धारित होने के बाद नासा करेगा.


अंतरिक्ष में तैरते एस्टेरॉइड और धूमकेतु अक्सर पृथ्वी के लिए ख़तरा माने जाते हैं और हर साल वैज्ञनिक हज़ारों एस्टेरॉइड की खोज करते हैं. 2013 में भी रूस के आकाश में एफिल टावर जितना भारी एक एस्ट्रॉइड फटा था जिसकी शॉकवेब से एक हज़ार से ज्यादा लोग घायल हुए थे.


यह दोनों लड़कियां एक एस्टेरॉइड सर्च कैम्पेन से जुड़ी थी ​जिसे स्पेस इंडिया ने इंडरनेश्नल एस्ट्रोनोमिकल सर्च कोलोब्रेशन यानि IASC के साथ आयोजित किया था. IASC, NASA से जुड़े सिटिजन साइंटिस्ट का एक ग्रुप है.

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