'सभी तक पहुंचें कोरोना के टीके' : संयुक्त राष्ट्र

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'सभी तक पहुंचें कोरोना के टीके' : संयुक्त राष्ट्र

अब चलते हैं अगली ख़बर की ओर. संयुक्त राष्ट्र सभा के सभी 193 सदस्यों ने आम सहमति से एक प्रस्ताव पारित कर यह कहा है कि भविष्य में कोरोना वायरस से निपटने के लिए बनने वाले टीके की सभी तक तक पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए। सोमवार को पारित इस प्रस्ताव में अब तक इस महामारी से लड़ने में विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका को भी रेखांकित किया गया। बता दें कि कुछ ही दिनों पहले अमेरिका ने इस महामारी से निपटने में नाकाम रहने की बात कहते हुए संगठन को दी जाने वाली आर्थिक मदद रोक दी थी। हालांकि सोमवार को पारित इस प्रस्ताव का अमेरिका ने समर्थन किया जिसमें कोविड-19 से लड़ने के लिए अंतर राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है। प्रस्ताव में इस बात को ख़ास तौर पर रेखांकित किया गया है कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए भविष्य में बनने वाले टीके और सभी संबंधित चिकित्सकीय सुविधाओं की पहुंच सभी प्रभावित देशों समेत विकासशील देशों तक सुनिश्चित की जाए।

कच्चा तेल हुआ सस्ता

इतिहास में पहली बार यह हुआ है कि कच्चे तेल की क़ीमतें ज़ीरो डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे चली गई हैं. इस ऐतिहासिक गिरावट का कारण कोरोना महामारी के चलते कच्चे तेल की मांग में आई भारी कमी को माना जा रहा है। दुनिया भर में अलग अलग देशों में कम या अधिक, सख़्ती के साथ लगाए गए लॉकडाउन का असर, अब अर्थव्यवस्थाओं को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले क्षेत्रों में भी दिखने लगा है. दुनिया भर में कच्चे तेल की क़ीमतें बुरी तरह गिरी हैं और अमेरिकी कच्चे तेल की क़ीमत इतिहास में पहली बार ज़ीरो डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे माइनस में चली गई है. सोमवार को, अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतों के बेंचमार्क, वेस्ट टेक्सेज़ इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) में शुरुआत में कच्चे तेल की कीमत 18.27 डॉलर प्रति बैरल थी, जो बाज़ार बंद होते-होते शून्य के भी नीचे चली गई। मंगलवार को यह क़ीमत और गिरते हुए माइनस 37.63 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं. यानि की क्रूड आॅयल बेच रही कंपनियां ग्राहकों को तेल ख़रीदने के लिए पैसे दे रही हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि ये कंपनियां स्टोरेज़ की कमी से जूझ रही हैं. यही हाल अंतराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की कीमतों का भी है. अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट में भी कच्चे तेल के दाम में 8.9 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई. यहां तेल की कीमत 26 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने मौजूदा संकट को कुछ ही समय का संकट बताया है. व्हाइट हाउस के प्रेस ब्रीफ़ में उन्होंने य​ह भी कहा है कि तेल की कीमतों में ​इस गिरावट को वे एक मौक़े की तरह देख रहे हैं जिससे राष्ट्रीय स्ट्रेटेज़िक रिजर्वस् को भरा जा सकेगा. ''तेल की क़ीमतों में रिकॉर्ड गिरावट में कई लोग रुचि दिखा रहे हैं. हम अपने राष्ट्रीय पैट्रोलियम स्ट्रेटज़िक रिजर्वस् को भर रहे हैं. हम कम से कम साढ़े सात करोड़ बैरल कच्चे तेल का यहां संग्रहण करेंगे. किसी ने भी इससे पहले तेल की निगेटिव क़ीमतों के बारे कभी नहीं सुना हो लेकिन यह कुछ ही समय के लिए है. यह संकट जल्द ही टल जाएगा.''

अमेरिका ने लगाई प्रवासियों पर रोक

इसबीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रम्प ने कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने की बात कहते हुए अमेरिका में प्रवासियों के प्रवेश पर अस्थाई रूप से रोक लगाने की घोषणा की है। सोमवार देर रात एक ट्वीट से यह घोषणा करते हुए ट्रम्प ने कहा कि वह जल्द ही इस संबंध में कार्यकारी आदेश जारी करेंगे। ट्रम्प ने कहा कि कोरोना वायरस के रूप में अदृश्य दुश्मन से लड़ने और अमेरिकी लोगों के रोज़गार की रक्षा लिए वे यह कदम उठा रहे हैं। बता दें कि ट्रम्प अमेरिका में प्रवासियों के प्रवेश पर पाबंदी लगाने के समर्थक रहे हैं और कोरोना महामारी के चलते आए संकट ने उन्हें यह मौका दे दिया है। वहीं कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने इस फ़ैसले की आलोचना करते हुए कहा कि ट्रम्प सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए इस तरह के क़दम उठा रही है। यह भी ग़ौरतलब है कि ट्रम्प प्रशासन ने पहले ही कोरोना चीन, यूरोप, कनाडा और मैक्सिको की यात्रा पर पाबंदी लगा रखी है।

'कोरोना के चलते प्रेस की आज़ादी पर ख़तरा'

पेरिस स्थित रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स ने अपना सालाना प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक जारी करते हुए कहा है कि कोरोना महामारी के चलते प्रेस की आज़ादी और भी अधिक खतरे में पड़ी है। उसने कहा कि इस महामारी के चलते कई देशों की सरकारों ने स्थिति का लाभ उठाते हुए कई ऐसे दमनकारी कदम उठाए हैं जिन्हें सामान्य स्थितियों में लागू करना संभव नहीं था। रिपोर्ट में चीन की ख़ास तौर पर आलोचना की गई है जो प्रेस आज़ादी के मामले में 180 देशों की सूची में 177वें स्थान पर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया पर आए संकट ने दिखा दिया है कि चीन की सूचनाओं को आक्रामक ढंग से नियंत्रित करने की नीति के कितने भयानक नतीजे हो सकते हैं। रिपोर्ट में हाल में हंगरी में गलत सूचनाओं से निपटने के बनाए गए कानून को भी प्रेस की आज़ादी के लिए खतरनाक बताया गया है।

कारोना संकट

पूरी दुनिया में अब तक संक्रमित हुए लोगों की तादात 24,98,474 पहुंच गई है. 1,71,332 मौतें हुई हैं और 6,57,808 लोग ठीक भी हुए हैं.

(यहां बताए गए सारे आंकड़े वल्डोमीटर www.worldometers.info से लिए गए हैं.)

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