US ने लगाए Myanmar के सैन्य तानाशाह पर प्रतिबंध

म्यांमार में लोकतंत्र की बहाली के लिए प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सेना के क्रूर दमन को देखते हुए बुधवार को अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन ने वहां के सैन्य शासन के खिलाफ बडा कदम उठाया है. सैन्य तानाशाह आंग मिन हलाइन के दो बच्चों और उनकी छह कंपनियों को प्रतिबंधित कर दिया है.

अमेरिका ने बुधवार को म्यांमार में तख़्तापलट के बाद सैन्य शासन की कमान संभाल रहे तानाशाह मिन आंग हलाइन के दो बच्चों के ख़िलाफ़ कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं.


अमेरिका ने यह क़दम सैन्य तानाशाही का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर क्रूर हिंसा से भरी दमनात्मक कार्रवाई के ख़िलाफ़ उठाया है.


म्यांमार में प्रदर्शनकारियों पर सेना के हालिया दमन के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की कार्रवाई का दबाव था. अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट के बयान में बुधवार को कहा गया कि उसने मिन आन्ग की दो वयस्क संतानों आॅन्ग पे सोन और खिन थिरी थेट मोन के साथ ही उनकी छह कंपनियाों को भी प्रतिबंधित कर दिया है.


अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि उनके इस क़दम के बाद लोकतंत्र का गला घोंटने वाले तख़्तापलट के नेता और उनके वयस्क परिजन उस सैन्य शासन का कोई फायदा नहीं उठा पाएंगे.


ब्लिंकन ने आगे कहा, ''हिंसा के लिए ज़िम्मेदार और जनआकांक्षाओं को दबाने वालों के ख़िलाफ़ हम आगे भी सख़्त क़दम उठाने में नहीं हिचकेंगे. ये प्रतिबंध म्यांमार के लोगों के समर्थन में हैं और तख़्तापलट के ज़िम्मेदार लोगों के विरोध में.''



वहीं म्यांमार से भागकर भारत के मिजोरम में शरण के लिए आए म्यांमार के पुलिसकर्मियों ने बीबीसी से बात करते हुए बताया है कि उन्हें सेना ने लोगों पर गोलियां दागने के आदेश दिए थे. उन्होंने सेना का हुक़्म मानने से इनक़ार किया और वे सरहद पारकर भारत चले आए. भारत भागकर आने वाले लोगों की संख्या एक दर्जन से ज्यादा है.


उन्होंने कहा है कि वे इस बात से डर गए थे कि उन्हें आम लोगों की जान लेने या उन्हें नुकसान पहुँचाने के लिए मजबूर किया जा सकता है. इसलिए वे भाग गए.


बीबीसी ने इन पुलिसकर्मियों में से 27 साल के एक पुलिसकर्मी से बात की है जो कि बीते नौ साल से म्यांमार पुलिस में कार्यरत हैं. इस पुलिस कर्मी के हवाले से बीबीसी ने लिखा है, ''पुलिसवालों और महिलाओं का एक ग्रुप था जिनकी उम्र 20 से 30 के बीच रही होगी. मैं डरा हुआ था कि मुझे मिलिट्री के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे मासूम लोगों को नुकसान पहुंचाने या उनकी जान लेने के लिए मजबूर किया जाएगा. हमें लगता है कि एक चुनी हुई सरकार का तख़्तापलट कर सेना ने गलती की है.''


वहीं म्यांमार में क्रूर दमन के बावजूद विरोध कर रहे लोगों का हौसला टूटा नहीं है. वहां से एक फ़ोटो वायरल हुई है, जिसमें अधेड उम्र की एक नन अपने घुटनों के बल सड़क पर बैठकर सैनिकों से कह रही है, ''प्रदर्शन कर रहे मासूम बच्चों के बजाय मुझे गोली मार दो.''