उत्तराखंड हाइकोर्ट ने दी पंचायत चुनाव के इच्छुक उम्मीदवारों को राहत


पंचायती राज संशोधन एक्ट के तहत बच्चों की निर्धारित सीमा के चलते अयोग्य हो रहे इच्छुक उम्मीदवारों को हाइकोर्ट ने राहत दी है. अब अगर उनके दो से ​अधिक बच्चे भी हैं तो भी वे चुनाव लड़ सकेंगे.

-khidki desk



उत्तराखंड में पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुए ऐसे व्यक्तियों के लिए हाइकोर्ट ने एक राहत भरा फ़ैसला दिया है जो कि दो से अधिक बच्चे होने के ​कारण चुनाव नहीं लड़ पा रहे थे. चुनाव लड़ने के इच्छुक 7 अलग-अलग याचिकाकर्ताओं की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ऐसे प्रत्याशियों को राहत दी है, जिन्हें पंचायत राज एक्ट में उत्तराखंड सरकार की ओर से किए गए संशोधन के बाद, तीन या ​अधिक बच्चे होने के चलते चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया गया था.


हालांकि हाइकोर्ट ने इस मसले पर एक सीमा का निर्धारण किया है और यह राहत सिर्फ 25 जुलाई 2019 से पहले जिनके दो से अधिक बच्चे हैं उनके लिए ही है. यदि इस समयावधि के बाद किसी व्यक्ति के 2 से अधिक बच्चे होंगे तो वह चुनाव नहीं लड़ पाएगा.


पंचायत राज संशोधन एक्ट में दो बच्चों और शैक्षिक योग्याता की अनिवार्यता पर देशभर में लगातार सवाल उठते रहे हैं. कई एक्टिविस्ट्स का मानना है कि किसी लोकतंत्र में इस क़िस्म की अनिवार्यताएं थोपकर किसी को चुनाव लड़ने के उसके लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित कर देना लोकतंत्र विरोधी है . इससे पहले ​हरियाणा पंचायत राज संशोधन एक्ट पर भी विवाद हुआ था लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने उसके पक्ष में फ़ैसला देकर राज्य सरकार की पहल को समर्थन दिया था.

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